Love Marriage में आ रही रूकावटे तो जानिए विवाह के लिए ज्योतिषीय योग, शादी में हो रही देरी तो करें ये उपाय

 

व्यक्ति के जिंदगी में प्यार कहिए या प्रेम सभी के परिवार में तो कायम रहता है. वैवाहिक जिंदगी में पति-पत्नी के प्रेम में उतार-चढ़ाव बनता-बिगड़ता रहता है. ये बात नहीं है कि केवल प्रेम विवाह में विवाह के बाद प्रेम में खटास आने लगती है, बल्कि अरेंज्ड विवाह में भी ऐसा होना अपवादस्वरूप मौजूद है. प्रेम विवाह करने के पहले अपना तथा होने वाले साथी का कुण्डली का विश्लेषण जरूर कराए या देखे ताकि अपना वैवाहिक जीवन सुखमय बीता सकें. आइए जानते है ज्योतिष एवं रत्न विशेषज्ञ संजीत कुमार मिश्रा से कि आपकी कुण्डली में ग्रह - नक्षत्रों के प्रभाव के कारण प्रेम विवाह के लिए किस प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है...

प्रेम-विवाह के ज्योतिषीय योग

  • जन्म पत्रिका में मंगल यदि राहु या शनि से युति बना रहा हो तो प्रेम-विवाह की संभावना होती है.

  • जब राहू प्रथम भाव यानी लग्न में हो परंतु सातवें भाव पर बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही हो तो व्यक्ति परिवार के विरुद्ध जाकर प्रेम-विवाह की तरफ आकर्षित होता है.

  • जब पंचम भाव में राहु या केतु विराजमान हो तो व्यक्ति प्रेम-प्रसंग को विवाह के स्तर पर ले जाता है.

  • जब राहु या केतु की दृष्टि शुक्र या सप्तमेश पर पड़ रही हो तो प्रेम-विवाह की संभावना प्रबल होती है.

 

  • पंचम भाव के मालिक के साथ उसी भाव में चंद्रमा या मंगल बैठे हों तो प्रेम-विवाह हो सकता है.

  • सप्तम भाव के स्वामी के साथ मंगल या चन्द्रमा सप्तम भाव में हो तो भी प्रेम-विवाह का योग बनता है.

  • पंचम व सप्तम भाव के मालिक या सप्तम या नवम भाव के स्वामी एक-दूसरे के साथ विराजमान हों तो प्रेम-विवाह का योग बनता है.

  • जब सातवें भाव का स्वामी सातवें में हो तब भी प्रेम-विवाह हो सकता है.

 

  • शुक्र या चन्द्रमा लग्न से पंचम या नवम हों तो प्रेम विवाह कराते हैं.

  • लग्न व पंचम के स्वामी या लग्न व नवम के स्वामी या तो एकसाथ बैठे हों या एक-दूसरे को देख रहे हों तो प्रेम-विवाह का योग बनाते हैं.

  • सप्तम भाव में यदि शनि या केतु विराजमान हों तो प्रेम-विवाह की संभावना बढ़ती है.

  • जब सातवें भाव के स्वामी यानी सप्तमेश की दृष्टि द्वादश पर हो या सप्तमेश की युति शुक्र के साथ द्वादश भाव में हो तो प्रेम-विवाह की उम्मीद बढ़ जाती है.

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