झटके पे झटका ... कांग्रेस का जिले में बनेगा बोर्ड ?


 

भीलवाड़ा (राजकुमार माली)। निकाय चुनाव में कांग्रेस ने दो जगह बहुमत हांसिल किया है लेकिन आपसी खींचातान के चलते इस बार निकाय अध्यक्ष व सभापति का एक भी पद कांग्रेस के खाते में जाता नजर नहीं आ रहा है। आसींद में बहुमत होने के बावजूद आपसी गुटबाजी के चलते पति पत्नी ने हाथ का साथ छोड़ कमल का दामन थाम लिया और वह भाजपा से सभापति के दावेदार भी बन गये है जिससे कांग्रेस को गहरा आघात लगा है।
भीलवाड़ा में कांग्रेस में गुटबाजी के चलते लगातार पार्टी की स्थिति डगमगा रही है। भीलवाड़ा नगर परिषद के लिए हुए 70 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस ने 22 स्थानों पर जीत हांसिल की और भाजपा 31 स्थानों पर जीती। 17 पर निर्दलीयों ने जीत हांसिल की। कांग्रेस के चाणक्य माने जाने वाले ओमप्रकाश नराणीवाल ने जोड़ तोड़ कर बोर्ड बनाने का प्रयास किया लेकिन आपसी फूट फजीहत का असर रहा कि कांग्रेस से जुड़े दो पार्षद दूसरे खेमे से जा मिले, ऐसी चर्चा है। वहीं एक पार्षद ने तो खुलकर कहा कि वह अपने आका जो कहेंगे उसी को वह वोट देंगे।फूट फजीहत के चलते ही निर्दलीय पार्षदों को कांग्रेस अपने पक्ष में नहीं कर पाई और भाजपा के खेमे से जा मिले। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के पास अपने पार्षदों के अलावा करीब 14 पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। वहीं रही सही कसर कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय पेड़ीवाल ने सभापति के लिए दावेदारी जताकर पूरी कर दी है।
कांग्रेस का आज सबसे बड़ा झटका आसींद नगर पालिका में लगा है जहां कांग्रेस से वार्ड नं. 16 से जीते देबीलाल साहू और वार्ड नं. 12 से जीती उनकी पत्नी मीना साहू ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का हाथ थाम लिया। खास बात यह रही कि कांग्रेस छोडऩे के बाद भाजपा ने उन्हें गले ही नहीं लगाया बल्कि देबीलाल साहू को सदस्यता देने के साथ ही नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए साहू को प्रत्याशी बना दिया। 25 सदस्यों वाली नगर पालिका में कांग्रेस के 13 सदस्य पार्षद चुने गए थे और 9 पर भाजपा ने व 3 पर निर्दलीय जीते थे। पति पत्नी के कांग्रेस छोड़ जाने से कांग्रेस और भाजपा के सदस्य बराबर हो गए है। अब तीन निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका में आ गये है। साहू दम्पत्ति के कांग्रेस छोड़ जाने के बाद पूर्व विधायक हगामीलाल मेवाड़ा के पुत्र संजय मेवाड़ा तथा वार्ड संख्या 4 से निर्वाचित गणेश लाल मेहता ने अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस से परचे दाखिल किये है। मेवाड़ा ने दावा किया है कि उनके पास पूरा बहुमत है और वे बोर्ड बनायेंगे। जबकि भाजपा विधायक जब्बर सिंह सांखल ने भी इसी तरह का दावा किया है। अब जोड़ तोड़ के खेले में कांग्रेस जीती हुई बाजी फिर जीतेगी या हार जायेगी, इस पर सभी की निगाह लगी हुई है। 
शाहपुरा, गंगापुर और गुलाबपुरा में पहले ही बीजेपी का बोर्ड बनता नजर आ रहा है। गुलाबपुरा में पूर्व चेयरमेन धनराज गुर्जर फिर इसी सीट पर काबिज होंगे, ऐसी चर्चा है। जहाजपुर और मांडलगढ़ में भी स्थिति कांग्रेस के अनुकूल नहीं बताई जा रही है। ऐसे में जोड़ तोड़ में अगर कांग्रेस सफल होती है तो जहाजपुर व मांडलगढ़ में कांग्रेस का बोर्ड बन सकता है और जोड तोड में सफल नहीं हो पाते तो भीलवाड़ा जिले में कांग्रेस किसी भी नगर पालिका और परिषद में अपना अध्यक्ष और सभापति नहीं बना पायेगी। 
दबी दुबान से एक कांग्रेस नेता का कहना था कि कांग्रेस एक नहीं बल्कि कई गुटों में बंटी है जिसके चलते ही आज यह स्थिति बनी है। अगर एक होती तो कम से कम तीन चार जगह कांग्रेस का बोर्ड बनता। 

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