नवनिर्वाचित सभापति पाठक के सामने कई चुनौतियां !


भीलवाड़ा (विजय गढ़वाल) । शहर में एक बार फिर भाजपा का नगर परिषद में बोर्ड बना है। पिछले बोर्ड को लेकर लोग खासे नाराज ही नहीं रहे बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था धूल धूसरित हो गई है, अतिक्रमण बढ़ा है, टूटी सड़क और नालियों से लोग परेशान है और आवारा पशुओं के चलते कई लोग अकाल मौत के शिकार हुए। अब नये बोर्ड और युवा सभापति राकेश पाठक से लोगों की कई उम्मीदें है।
भीलवाड़ा शहर का दुर्भाग्य कहें या कुछ और पिछला बोर्ड लोगों के लिए परेशानी वाला ही रहा है। इस बार पुराने अधिकांश चेहरे नगर परिषद से गुम हो गए है या यूं कहें कि लोगों ने उन्हें अलविदा कह दिया है। अब नये सभापति पाठक के सामने ऐसी कई चुनौतियां है।
टूटे सर्किल :
नगर परिषद में सौंदर्यकरण के नाम पर शहर में टूटे सर्किल ही नजर आते है। शहर की धड़कन गोल प्याऊ चौराहा हो, कॉलेज रोड, वीर सावरकर चौक जैसे अनेक सर्किल है जो टूटे और क्षतिग्रस्त पड़े है। 
यातायात :
शहर में याताात की हालत काफी खस्ता है। सड़कों पर अतिक्रमण इतना फैला है कि आधी सड़कें अतिक्रमणकारियों की गिरफ्त में है। पार्किंग की पुख्ता व्यवस्था नहीं होने से बाजार में सड़क के बीच ही वाहन खड़े कर दिए जाते है जिससे लोगों को आने जाने में खासी दिक्कतें होती है। इंदिरा मार्केट, पेच एरिया, सूचना केन्द्र, बाजार नं. २, हरिशेवा धर्मशाला आदि प्रमुख है जहां यातायात काफी खस्ता हाल है। 
अतिक्रमण : नगर परिषद ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर अब तक खानापूर्ति की जिसके चलते आजाद चौक, इंदिरा मार्केट, कॉलेज के निकट चौपाटी, भूपाल क्लब के पास तो दुपहिया वाहन चालकों को भी आने जाने में दिक्कतें होती है। आजाद चौक में तो चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति भी पूरी तरह अतिक्रमणकारियों की गिरफ्त में है। यही नहीं आजाद चौक की सड़क ही नहीं अन्दरूनी हिस्सा भी अब अतिक्रमण की गिरफ्त में आ चुका है।
अवैध निर्माण : 
नगर परिषद ने पिछले पांच सालों में अवैध निर्माण के कोई प्रयास नहीं किया सिर्फ कागजी प्रयास हुए है। दिखावे के तौर पर जिन अवैध निर्माणों पर रोक लगाई गई वे आज शान से खड़े है। सिंधुनगर में कई काम्पलेक्स सांठगांठ के चलते बन चुके है। नगर परिषद के इर्द गिर्द ही कई अवैध निर्माण चल रहे है। अवैध निर्माण करने वालों को नगर परिषद ने नोटिस तो थमाए लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ दिन काम बन्द करवा फिर से सांठगांठ कर उन्हें निर्माण की छूट दे दी गई।
सड़क-नाली :
शहर में कई ऐसी सड़कें है जहां निर्माण की आवश्यकता नहीं है उन्हें पहले सीमेंट का बनाया गया और फिर तोड़कर डामरीकृत कर दिया गया। इसका उदाहरण भीलवाड़ा कलेक्टे्रट कार्यालय के निकट देखा जा सकता है। यहीं नहीं शहर की कॉलोनियों में सड़कें टूटी पड़ी है। टूटी नालियों से सड़कों पर पानी बह रहा है लेकिन उनकी सुध नहीं ली गई है। पांच साल में कई इलाकों में नाली निर्माण की मांग की गई लेकिन पार्षद और सभापति ने वोट नहीं मिलने की बात कहकर उन इलाकों में काम कराने से भी परहेज किया। इसका खामियाजा वर्तमान चुनाव में देखने को मिला है।
इस संबंध में नवनिर्वाचित सभापति ने हलचल से बातचीत करते हुए कहा कि शहर के विकास में कोई कमी नहीं रखी जाएगी और कम से कम एक माह तक १६ घंटे परिषद की पूरी टीम को शहर की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी क्षमता से लगायेंगे। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर न तो किसी प्रताडि़त किया जाएगा और न ही परेशान। उन्होंने कहा कि नगर परिषद कर्मचारी, अधिकारी और पार्षदों को साथ लेकर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।