अब पुराने वाहनों को रखना हो सकता है महंगा, जानें क्या है कारण

 

नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। देश में वायु प्रदूषण एक बार फिर से अपने खराब स्तर पर पहुंच गया है। जिससे निपटने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। जाहिर है प्रयास का परिणाम भी देखने को मिलेगा। इन प्रयासों के तहत ही सरकार पुराने वाहन पर कई योजनाएं लेकर आ रही है। हाल ही में बजट में भी पुराने वाहनों को लेकर स्क्रैपेज पाॅलिसी सहित घोषणाएं की गई। कुछ दिनों पहले ही हमने आपको बताया था कि 15 दिनों के भीतर स्क्रैपेज पॉलिसी की घोषणा की जाएगी। वर्षों के इंतजार के बाद ही सही लेकिन इसे अब लागू किया जाएगा।

कब तक होगी लागू: वहीं नई रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि सरकार 15 साल से अधिक पुराने वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्र को नवीनीकृत करने की लागत बढ़ाने पर विचार कर रही है। ना सिर्फ अधिकारी पुराने निजी वाहनों पर विचार कर रहे हैं, बलिक पुराने वाणिज्यिक वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणन शुल्क में भी वृद्धि की जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि इसे नई स्क्रैपेज पॉलिसी की ही तरह लागू होने में कुछ साल लगेंगे।

लेकिन अगर हालिया रिपोर्ट पर विश्वास किया जाए तो पुराने वाहनों के पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए फीस में बढ़ोतरी वाहन स्क्रैपिंग नीति का एक हिस्सा होगी जिसे केंद्रीय बजट 2021 के हिस्से के रूप में घोषित किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि "वाहनों के पुन पंजीकरण में वृद्धि होगी। विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए किराया अलग-अलग होगा और मध्यम से भारी वाणिज्यिक वाहनों को सबसे अधिक वृद्धि का सामना करना होगा।

उन्होंने कहा कि "विभिन्न श्रेणियों के लिए अंतिम दर स्लैब पर अभी भी चर्चा की जानी बाकी है।" रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 15 साल पुराने कमर्शियल वाहन के लिए फीस 200 रुपये कैब के लिए 7,500 रुपये तक बढ़ाई जा सकती है, वहीं ट्रक के लिए यह 12,500 रुपये के आसपास होगी। (यहां दी गई फीस अनुमानित है।)

 

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