ओपिनियनकोरोना से डरें नहीं, लड़ें


कोरोना से पहले भी देश ने महामारियों का सामना किया है. आज हमें अपना बचाव करना है. कोरोना को लेकर हमारे मन में कई सवाल उठते हैं. मैं डॉक्टर के अलावा एक कोरोना मरीज भी रहा हूं, इसलिए इस बीमारी से अच्छी तरह वाकिफ हूं. जब मुझे कोरोना हुआ, तो मेरे अंदर हल्के लक्षण थे. रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मैं होम आइसोलेशन में चला गया. कुछ दिनों बाद हालत गंभीर हो गयी और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. प्लाज्मा थेरेपी से इलाज के बाद अब स्वस्थ होकर फिर से काम में जुटा हूं.


इसलिए, कोरोना से डरने की नहीं, बल्कि लड़ने की जरूरत है. कोरोना से बचने के लिए तीन बातों का ख्याल रखना जरूरी है. पहला है सामाजिक दूरी, दूसरा बार-बार हाथ धोना और तीसरा है मास्क पहनना. यदि इसके बाद भी कोरोना हो जाये, तो भी घबराने की जरूरत नहीं है. स्वास्थ्य मंत्रालय के गाइडलाइन का पालन करते हुए चिकित्सकीय मदद लें.



कोरोना संक्रमण के बाद हमारी इम्युनिटी कमजोर हो जाती है. इम्युनिटी कमजोर होने से दूसरी बीमारियों का भी डर रहता है. वह भी तब, जब उम्र 60 साल से अधिक हो. लेकिन, डर के आगे जीत है. एक बार जब आप कोरोना से ठीक हो जाते हैं, तो दोबारा कोरोना संक्रमण का खतरा बहुत कम हो जाता है. उसके बाद आप फिर से कोरोना मरीजों के साथ काम कर सकते हैं. मेरी उम्र 60 साल से अधिक है और मुझे डायबिटीज और ब्लड प्रेशर भी था. मैंने सामाजिक दूरी का पालन भी किया, लेकिन फिर भी हुआ. क्योंकि, उस समय की गाइडलाइंस से हमें नुकसान उठाना पड़ा.


पहले गाइडलाइन यह थी कि यदि आपके साथ ड्यूटी में लगे किसी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण पाया जाता था, तो आपका भी टेस्ट किया जाता था और आपको 15 दिन की छुट्टी दी जाती थी. लेकिन जब मुझे कोरोना हुआ, तो उस समय सरकार ने यह गाइडलाइन वापस ले ली थी. एक महिला जो दूसरी जगह ड्यूटी करके आयी थी, उसकी ड्यूटी मेरे साथ लगा दी गयी. वह कोरोना पॉजिटिव थी. ऐसे में पूरी एहतियात बरतने के बावजूद मुझे कोरोना हो गया. हालांकि, अब वे दिशा-निर्देश वापस ले लिये गये हैं.


जिन्हें डायबिटिज, हार्ट, किडनी, मोटापा, अस्थमा की बीमारी नहीं है और कोरोना के लक्षण हल्के हैं, ऐसे लोग घर में ही कोरेंटिन हो जायें. अगर सभी लोग अस्पताल जाने लगे, तो अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा. कोरोना मरीज के साथ कोई अटेंडेंट नहीं होता है, आपको एक ग्लास पानी के लिए भी अस्पताल के कर्मचारी पर निर्भर रहना पड़ता है.


डॉक्टर, नर्स या अन्य स्टाफ की कमी है. घर में जो भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक समर्थन मिलता है, वह अस्पताल में संभव नहीं है. इसीलिए अस्पताल तभी जायें, जब सांस लेने में दिक्कत होने लगे या खांसी और बुखार भी हो. ऐसे लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल मे भर्ती होना चाहिए. क्योंकि, इसके तेज लक्षण दो से चार दिन के बाद देखने को मिलते हैं, इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए.


डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या हार्ट की दिक्कत वाले लोगों को कोरोना होने पर अस्पताल में भर्ती होना चाहिए. बिना लक्षण वाले मामले भी आ रहे हैं. लोग बताते हैं कि वे किसी के संपर्क में नहीं आये और न ही किसी तरह के लक्षण ही दिखे, फिर भी उन्हें कोरोना कैसे हो गया? दरअसल, बाहर से कोई सामान लाने से भी यह वायरस आ जाता है, इसलिए बाहर से लाने या आने वाली चीजों को बाहर रखें और पूरी तरह से सेनेटाइज करके कुछ घंटों के बाद ही उसका उपयोग करें.


कोरोना मरीज को प्लाज्मा थेरेपी से लाभ मिलता है. प्लाज्मा से शरीर में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में आठ से दस दिन का समय लग जाता है. इसलिए तबीयत ज्यादा खराब हो रही है, तो कोरोना से ठीक हो गये मरीज का प्लाज्मा देने से राहत मिलती है. अब कुछ दवाइयां आ गयी हैं, जिससे शरीर में साइटोकाइन तूफान को दबाने में मदद मिलती है. इंफ्लेमेशन यानी शरीर में कुछ सूजन आ गया हो, तो उसको दबाने के लिए भी दवा काम करती हैं. कोरोना से शरीर में हीमोग्लोबिन, ऑक्सीजन को ले जाने का काम नहीं कर पाता है.


मलेरिया में भी यही होता है कि ऑक्सीजन पूरे शरीर में नहीं जाता है और रेड सेल टूट जाते हैं. इसलिए, मलेरिया की दवा क्लोरोक्वीन से फायदा होता है. अब तक इसकी कोई सटीक दवा नहीं आयी है, लेकिन इससे फायदा दिख रहा है. हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए फैबिफ्लू टेबलेट है. जबकि गंभीर मरीजों के लिए रेमडेसिवीर का इंजेक्शन कोविफोर भी आया है, हालांकि यह महंगा है. इसके अलावा सस्ती डेक्सामेथासोन को भी कोरोना के इलाज के लिए मंजूरी दी गयी है. इनका उपयोग डॉक्टर से सलाह के बाद किया जा सकता है.


कोरोना शरीर और इम्युनिटी दोनों को कमजोर करता है. इससे कुछ लोगों में टायफाॅयड और मलेरिया के लक्षण भी देखे गये हैं. इसके लिए प्रोटीन लेना चाहिए. कोरोना होने से शरीर में कमजोरी होती है, इसलिए विटामिन सी और विटामिन डी लेना बहुत ही जरूरी है. भाप और गार्गल करना चाहिए. उल्टा सोकर सांस लेना चाहिए. इसके अलावा एंटीबायोटिक, पैरासिटामोल की गोलियां लेनी चाहिए. काढ़ा गले में खरास को दूर करता है. ये सब जरूरी उपाय हैं.


डॉ राजीव सूद, डीन एवं एचओडी यूरोलॉजी विभाग, डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नयी दिल्ली


(बातचीत पर आधारित)



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