हरिद्वार धर्म संसद : भड़काऊ भाषण के खिलाफ 3 लोगों पर केस दर्ज, देश में मचा है सियासी कोहराम

 



नई दिल्ली/हरिद्वार : हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में तथाकथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर इस्तेमाल शब्दों को लेकर देश में सियासी कोहराम मचा हुआ है. हालांकि, इस मामले को लेकर हरिद्वार में पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने भड़काऊ भाषण देने के खिलाफ जिन लोगों पर केस दर्ज किया है, उनमें वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी, संत महामंडलेश्वर धर्मदास और महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती शामिल हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर इन तीन लोगों पर केस दर्ज किया है. हरिद्वार पुलिस ने इन पर आईपीसी की धारा 157 ए के तहत केस दर्ज किया है.

क्या है मामला?

बता दें कि हरिद्वार पिछले 17 से 19 दिसंबर के दौरान संतों की धर्म संसद का आयोजन किया गया था. यह धर्म संसद जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि की अध्यक्षता में आयोजित की गई है. मीडिया की रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि संतों की इस धर्म संसद में हिंदुत्व को लेकर भड़काऊ भाषण दिए गए और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया. इसके साथ ही, इसमें संतों के मंच से तथाकथित तरीके से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया गया. इस मामले को लेकर पूरे देश में सियासी कोहराम मचा हुआ है और राजनेता स्पष्ट तौर पर दो खेमों में बंटे हुए दिखाई दे रहे हैं.

राजद नेता शिवानंद तिवारी को अज्ञात व्यक्ति ने दी गाली

वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन पर कथित तौर पर गाली दी और धमकी दी. गाली देने वाला व्यक्ति गाय के संबंध में विनायक दामोदर सावरकर के विचार को लेकर तिवारी की टिप्पणी से नाराज था. राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तिवारी ने सावरकर के प्रति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) परिवार की श्रद्धा में निहित अंतर्विरोध को रेखांकित किया था, जिनके विचार गाय के बारे में हिंदुओं की भावनाओं के खिलाफ थे.

अज्ञात व्यक्ति के कॉल के बाद तिवारी ने मीडिया के साथ उस प्रतिक्रिया को साझा किया, जो उन्होंने वाट्सऐप पर व्यक्ति को एक संदेश के माध्यम से भेजी थी. तिवारी ने कहा कि व्यक्ति के बातचीत के लहजे से ऐसा लग रहा था कि वह दिल्ली, हरियाणा या पश्चिमी उत्तर प्रदेश से था. मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई है. यह अलग बात है. लेकिन मेरा अनुभव समाज को सांप्रदायिक रंग देने के खतरों की याद दिलाता है.

संतों की सांप्रदायिक भाषा पर गहलोत ने जताया ऐतराज

उधर, रविवार को हरिद्वार में हुई धर्म संसद में संतों द्वारा तथाकथित सांप्रदायिक भाषा के इस्तेमाल पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ऐतराज जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के देश में उनकी (संतों की) हिंसा वाली भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि संतों ने जिस तरह से हिंसा की भाषा का इस्तेमाल किया है, वह भारत की संस्कृति के खिलाफ है और अस्वीकार्य है. गहलोत ने कहा कि यह आश्यर्चजनक है कि नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री चुप हैं.

हिंदू धर्मगुरु ने गांधी की हत्या के लिए गोडसे की सराहना की

इसके अलावा, हिंदू धर्मगुरु कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे की रविवार को सराहना की. उन्होंने कहा कि लोगों को धर्म की रक्षा के लिए एक कट्टर हिंदू नेता को सरकार के मुखिया के तौर पर चुनना चाहिए. कालीचरण महाराज ने रायपुर में एक संगठन द्वारा आयोजित धर्म संसद में अपने संबोधन में महात्मा गांधी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसकी सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं ने आलोचना की.

यहां रावण भाटा मैदान में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन दिवस पर कालीचरण ने कहा कि हमारा मुख्य कर्तव्य क्या है - धर्म की रक्षा करना. हमें सरकार में एक कट्टर हिंदू राजा (नेता) का चुनाव करना चाहिए. भले ही वह (पुरुष या महिला) किसी पार्टी से संबंधित हो. हमारे घरों की महिलाएं बहुत अच्छी और सभ्य हैं और वे मतदान करने (चुनाव में) नहीं जाती हैं. जब सामूहिक बलात्कार होंगे, तो आपके घर (परिवार) की महिलाओं का क्या होगा. महामूर्खों, मैं उन लोगों का आह्वान कर रहा हूं जो वोट देने नहीं जाते हैं.

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