कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए मुखबिर योजना के तहत प्रोत्साहन राशि ढाई लाख रूपये से तीन लाख रुपए बढ़ाई

 


 जयपुर। चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि समाज में बेटियों को बचाने के जागरुक करने एवं सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से मुखबिर योजना के अन्तर्गत 1 अप्रेल से प्रोत्साहन राशि ढाई लाख रूपये से बढाकर तीन लाख रूपये कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में प्रदेश के चयनित 332 सामुदायिक केंद्रों पर सोनोग्राफी केंद्र भी बनाए जाएंगे।

डॉ. शर्मा शुक्रवार को स्वास्थ्य भवन में आयोजित राज्य पर्यवेक्षण बोर्ड की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रूण लिंग परीक्षण को रोकने एवं बेटियों को बचाने के लिये पीसीपीएनडीटी एक्ट की प्रभावी पालना सुनिश्चित की जा रही है। 

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पूर्व में मुखबिर योजना के तहत भ्रूण लिंग परीक्षण संबंधी प्राप्त सूचना पर तीन किश्तों में ढाई लाख रुपये तक की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी जाती थी लेकिन अब इसे और व्यावहारिक बनाते हुए सफल डिकाय ऑपरेशन पर मुखबिर, डिकॉय गर्भवती महिला एवं सहयोगी को दो किस्तों में कुल तीन लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जायेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य  सोनोलोजिस्ट की परीक्षा और प्रशिक्षण भी निरंतर करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सोनोग्राफी मशीनों को खरीदते समय बाय बैक पद्दति अपनाई जाए ताकि नई तकनीक आने के बाद पुरानी मशीनों को वापस कर नई मशीनें ली जा सके।

 

चिकित्सा सचिव  सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 265 राजकीय सोनोग्राफी केन्द्र एवं 3 हजार 483 निजी सहित कुल 3 हजार 748 रजिस्टर्ड सोनोग्राफी केन्द्र हैं। उन्होंने कहा कि  प्रदेश में पीसीपीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत इस वर्ष अब तक लगभग 1220 केन्द्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। वर्ष 2021 में अब तक तीन डिकॉय ऑपरेशन कर दो सोनोग्राफी सेंटर को सीज किया गया है और  7  व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक कुल 158 डिकॉय ऑपरेशन कर 170 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

पीसीपीएनडीटी की परियोजना निदेशक श्रीमती शालिनी सक्सेना ने बताया कि  वर्ष 2020-21 में कोरोना काल में गर्भवती महिला के संभावित संक्रमण हुए एवं गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य जोखिम के दृष्टिगत केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा जारी कोरोना दिशा निर्देशों एवं समय-समय पर लगे लॉकडाउन के कारण अधिक संख्या में डिकॉय आपरेशन संभव नहीं हो पाये हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सोनोग्राफी मशीनों के निर्माता, डीलर, डिस्टीब्यूटर इत्यादि का पंजीकरण पूर्ण रूप से ऑनलाईन करने के लिये तकनीकी प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली गयी हैं। शीघ्र ही पंजीकरण प्रक्रिया ऑनलाईन कर पंजीकरण प्रमाण पत्र भी आवेदक को ऑनलाईन उपलब्ध कराया जायेगा। इस अवसर पर आमजन तक मुखबिर योजना के प्रचार-प्रचार के लिये पोस्टर का आज विमोचन भी किया गया।

 

 

गौरतलब है कि राज्य में लगभग 130 एमआरआई सेंटर स्थापित है। इन सभी 130 एमआरआई सेंटर्स को तकनीकी विशेषज्ञों की राय अनुसार पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत पंजीकरण किया जाकर इन्हें भी अधिनियम के दायरे में लाने की तैयारी पूर्ण कर ली गयी है। राज्य में सोनोग्राफी केन्द्रों की ऑनलाईन पंजीकरण  प्रक्रिया 1 अप्रेल से प्रारम्भ की जा चुकी है। जिसके तहत अब तक कुल 68 केन्द्रों का पंजीकरण ऑनलाईन प्रक्रिया के माध्यम से किया जा चुका है।

इस अवसर पर नागौर के जायल से विधायक श्रीमती मंजू देवी, अलवर के बानसूर से विधायक श्रीमती शकुंतला रावत, मिशन निदेशक एनएचएम सुधीर शर्मा, निदेशक जन स्वास्थ्य डॉक्टर के के शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉक्टर एलएस ओला सहित संबंधित अधिकरण अधिकारीगण एवं सदस्यगण मौजूद रहे।

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