Wednesday, January 27, 2021

बेटी से दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले कलयुगी पिता को कोर्ट ने दूसरी बार सुनवाई में भी फांसी की सजा सुनाई


कोटा/ नाबालिग बेटी से रेप और फिर गर्भ ठहरने के बाद अबॉर्शन से इनकार करने पर उसकी हत्या के दोषी पिता को दूसरी बार कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। पॉक्सो कोर्ट 1 ने बुधवार को सुनवाई करते हुए फांसी की सजा बरकरार रखा है। कोर्ट ने इसे अति गंभीर, जघन्य प्रकृति, हृदय विदारक अपराध मानते हुए आदेश दिया कि दोषी को फंदे से तब तक लटकाया जाए जब तक कि उसकी मौत न हो जाए। फैसले में टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने लिखा कि ये समाज विरोधी प्रकृति का अपराध है। जिसमें उसने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ रेप के बाद हत्या की। जिससे न केवल पिता-पुत्री का रिश्ता तार-तार हुआ है, बल्कि इससे समाज में भी असुरक्षा और भय पैदा हुआ है।

 विशिष्ट लोक अभियोजक प्रेम नारायण नामदेव ने बताया कि पॉस्को कोर्ट 1 ने इस मामले में 1 साल पहले 20 जनवरी 2020 को भी दोषी पिता को फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन पोक्सो कोर्ट के फैसले को दोषी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने मृतका की मां से जिरह व बचाव पक्ष के गवाह के बयान कराने का निर्देश देते हुए दोबारा पोक्सो कोर्ट को मामले की सुनवाई करने को कहा था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा हुई सुनवाई में पीडिता की मां से जिरह हुई। साथ ही बचाव पक्ष के 3 गवाहों के बयान कराए गए थे। 19 जनवरी को कोर्ट ने आरोपी पिता को दोषी माना था। आज सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी पिता की फांसी की सजा को बरकरार रखा है।

ये था मामला

आरोपी पिता ने अपनी 17 साल की विमंदित (मानसिक तौर पर कमजोर) बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। इससे उसके गर्भ ठहर गया। गर्भ गिराने से मना करने पर मई 2015 में उसकी हत्या कर दी गई। मामले अहम बात यह थी कि बेटी की हत्या की शिकायत आरोपी के पिता ने ही नयापुरा पुलिस को दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के चार माह का गर्भ था। इस कारण पुलिस ने भूर्ण का डीएनए टेस्ट कराया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पिता ने ही प्रेग्नेंसी टेस्ट कार्ड लाकर दिया था। कलयुगी पिता ने बेटी का रेप किया था। लोकलाज की डर से पिता ने मौका पाकर बेटी पर हमला किया। सिर पर गम्भीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई।

18 गवाहों के बयान के बाद 20 जनवरी 2020 को पोक्सो कोर्ट क्रम 1 के विशिष्ट न्यायाधीश अशोक चौधरी ने मामले में फैसला सुनाया था। उन्होंने आरोपी पिता को दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास व हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी। मामले में न्यायाधीश ने तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा था 'जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता का निवास होता है' इंसान का परम कर्तव्य है कि वह अपने परिवार की रक्षा करें, लेकिन यहां परिवार के रिश्तो को ही तार-तार कर दिया। यह निसंदेह समाज में भय व असुरक्षा व्याप्त करने वाला है जो जन सामान्य के ह्दय व मानस पटल पर भारी आघात करता है।


बाजाद खुले, वाहनों की रेलमपेल रही और लोगो ने की खरीददारी

  भीलवाड़ा। जिले में लगभग पिछले दो माह से कर्फ्यु घोषित किया हुआ था राज्य सरकार के आदेशानुसार कर्फ्यु में ढ़ील देने के बाद बुधवार को सुबह 6 बज...