चारभुजा नाथ बने दूल्हे: तुलसी संग भगवान ने रचाया विवाह, हाथी पर मारा तोरण

 

शाहपुरा BHN

क्षेत्र के डाबला भोजका जी की बावड़ी स्थित देवनारायण मंदिर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा सहित पंच कुंडात्मक महायज्ञ और तुलसी चारभुजा विवाह का पंच दिवसीय धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। खामोर और डाबला ग्रामवासियों का इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में भरपूर सहयोग रहा।जानकारी के अनुसार  पंच दिवसीय आस्था के इस कुंभ में अनेक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हर्षोल्लास से किया गया।खामोर चारभुजा नाथ और तुलसी विवाह की मधुर बेला का आयोजन कुछ इस प्रकार हुआ की हर कोई ठाकुर जी का प्रेमी हो गया और थिरकने लगा।

देवनारायण सहित 6 मूर्तियों की हुई प्राण प्रतिष्ठा

पंच दिवसीय महाकुंभ में देवनारायण सहित शिव, काला गौरा, हनुमान, माताजी, गणेश की मूर्ति स्थापना की गई पूजा अर्चना कर विधि पूर्वक वैदिक मंत्रोच्चार से पंडित संजय जोशी के सानिध्य में विद्वान पंडितो द्वारा प्रतिष्ठा कार्य संपन्न किया गया इससे पहले रोजाना हवन कुंड में आहुतियां देकर सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया था।भव्य आयोजन में वैदिक मंडप में तुलसी को विराजित कर रोजाना जलपान कराया जाता था।ढोल नगाड़ों और भजन कीर्तन तथा ठाकुर जी के जयकारों के साथ हजारों श्रद्धालुओ ने मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा में भाग लिया पुष्प वर्षा के साथ शुभ मुहूर्त में प्रतिष्ठा हुई।

शाही ठाठ बाट से चारभुजा नाथ ने हाथी पर मारा तोरण

महायज्ञ और भव्य आयोजन को लेकर खामोर चारभुजा नाथ और तुलसी विवाह की सहमति के बाद डाबला ग्रामवासी खामोर पहुंचे और चारभुजा और तुलसी की सगाई रश्म पूरी की इसके बाद लग्न रश्म पूरी कर विनायक स्थापना के साथ नाच गान शुरू हुआ और बैंड बाजे तथा डीजे की धुन पर चारभुजा नाथ बंदोरा खाने पहुंचे तथा एक दिन पूर्व राजाराम बाल्दी ने भगवान चारभुजा को मायरा भरा जिसके पश्चात शनिवार सुबह 6:30 बजे नाकासी और ठाट बाट और शाही शानो शौकत से बारात रवाना हुई,हाथी घोड़ा पालकी के साथ पुष्प वर्षा से चारभुजा नाथ बेवाण में हाथी पर विराजमान हुए और शाही ठाठ बाट से ब्याह रचाने निकले जिनकी ग्रामवासियों और आस पास के ग्रामीणों ने भव्य शोभायात्रा निकाली,शोभायात्रा में हाथी पर विराजित भगवान ठाकुर जी और साथ में 5 ऊट,5 घोड़िया और 2 घोड़े,2 बैलगाड़ीया सहित हजारों की तादाद में भक्तगण डीजे,ढोल नगाड़ों के साथ ठाकुर जी के भजनों पर नाचते गाते आनंद लेते हुए रवाना हुए,चारभुजा मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा खामोर के मुख्य मार्गो से होते हुए नर्सिंग मंदिर पहुंचे जहा हाथी पर शाही ठाठ बाट से विराजमान चारभुजा नाथ की आरती हुई।जिसके बाद भारी संख्या में श्रद्धालु नाचते गाते डाबला रोड पर लंबी दूरी तय करते हुए  श्रद्धालु,डीजे,हाथी पीछे पीछे ऊट,घोड़ा,घोड़िया, बेलगाड़िया दिखाई दिए।

ड्रोन से भगवान पर हुई पुष्प वर्षा

विवाह के लिए रवाना हुए भगवान चारभुजा नाथ के साथ भारी संख्या में बाराती और श्रद्धालु भी थे जो नाचते गाते भगवान के विवाह का आनंद लेते ठाकुर जी के साथ ब्याह में जा रहे थे रास्ते में जगह जगह पुष्प वर्षा की गई तथा आतिशबाजी की गई इसके अलावा रास्ते में जगह जगह जलपान की व्यवस्था श्रद्धालुओ द्वारा की गई थी।ड्रोन से प्रकाश स्टूडियो द्वारा गुलाब के फूल बरसाए गए साथ ही वीडियो सूटिंग भी की गई,जिससे लग रहा था मानो साक्षात भगवान चारभुजा नाथ भक्तो के ह्रदय में बसे हुए हैं।तोरण के पश्चात तुलसी माता और चारभुजा नाथ का विवाह उत्सव हुआ तुलसी माता और भगवान चारभुजा का गरजोडा बांधा गया शादी की सभी रश्में विधि पूर्वक संपन्न की गई। 

ग्रामवासियों द्वारा ले जाया गया पडला

खामोर चारभुजा नाथ विवाह पर बारात में ग्रामवासियों द्वारा सोने और चांदी के आभूषण सहित तुलसी माता के लिए श्रृंगार,वेशभूषा सहित अनेक प्रकार के सामान लेकर पहुंचे।तथा विवाह के दौरान हथेलवा रश्म भी आयोजित हुई।

नानी बाई रो मायरा कथा संपन्न

पंच दिवसीय धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भोजका जी की बावड़ी नानी बाई रो मायरा कथा सुनने  पहुंचे जहा नानी बाई के मायरे के समापन में भक्त जूम उठे तथा कार्यक्रम में क्षेत्र के धर्म प्रेमियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया वही मृदुभाषी और मधुर आवाज में संगीतमय नानी बाई रो मायरा कथा का वाचन पंडित केदार तिवाड़ी के मुखारबिंद से हुआ।कथा सुनने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।आलम यह था कि सैकड़ों लोगों को पांडाल में बैठने की भी जगह नहीं मिली, जिसके कारण उन्हें पांडाल के बाहर खड़े होकर ही कथा का श्रवण करना पड़ा। कथा वाचक केदार तिवाड़ी ने शनिवार को कथा में बताया कि कलियुग में गो सेवा करने वाले व्यक्तियों को पुण्य की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि गाय पूरे विश्व की माता है,जिसमें सभी देवी-देवताओं का निवास रहता है।उन्होंने कहा कि गोमूत्र से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी छुटकारा मिल जाता है।
नानी बाई की कथा में बताया कि जब नानी बाई का भात भरने का समय आया तो उनके भाई नरसी भगत के पास भात भरने को कुछ भी नही था। अपने भगत की लाज बचाने के लिए स्वयं भगवान सांवरा सेठ बनकर भात भरने पहुंचे। बड़े चाव के साथ भगवान ने नानी बाई का छत्तीस करोड़ का भात भरा। भात को देखकर नानी बाई के ससुराल एवं गांव के सभी लोग भगवान की इस लीला को देखकर हैरान रह गए। आज कथा में भी नानी बाई का मायरा भरने के प्रसंग का सजीव चित्रण किया गया, जिसमें भगवान सांवरिया सेठ के साथ ही स्थानीय ग्रामवासियों जिसमें गरीब-अमीर सभी लोग शामिल थे। अपनी श्रद्धानुसार मायरा भरने में  सहयोग किया। श्रद्धालुओं में मायरा भरने के प्रति विशेष उत्सुकता नजर आई।आज कथा के अंतिम दिवस पर कथा श्रवण करने वाले भक्तों को प्रसादी वितरित की गई। कथा के समापन के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

विधायक मेघवाल ने की धर्मशाला निर्माण की घोषणा, 51 हजार नकद दिए

पंच दिवसीय धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन सांसद सुभाष चन्द्र बहेडिया, विधायक कैलाश मेघवाल, मंडल अध्यक्ष बालू कुमावत ने कार्यक्रम में शिरकत की जहा धार्मिक आयोजन में क्षेत्रवासियो की उत्सुकता देखकर मेघवाल प्रसन्न हुए तथा कार्यक्रम की सराहना की वही देवनारायण भगवान के धर्मशाला निर्माण करवाने की घोषणा की तथा 51 हजार भी भेट किए। कार्यक्रम में मौके पर डाबला सरपंच प्रद्युमन सिंह,समाजसेवी बलवंत सिंह,घरटा सरपंच रणजीत जाट,पंचायत समिति सदस्य रामप्रसाद गुर्जर डाबला सहित सैकड़ों धर्म प्रेमी उपस्थित रहे।

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