बास्योड़ा कल: बनने लगे ओलिया, पापड़-पपड़ी और गुंझिया, कल बासी खाना खाएंगे

 


भीलवाड़ा (हलचल)। यूं तो प्रदेशभर में कल शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। घरों में बासी खाना (एक दिन पहले बनाया हुआ) खाया जाएगा। मान्यता है कि शीतला सप्तमी को शीतला माता को बासी खाने का भोग लगाने से घर में महामारी व अन्य बीमारियां नहीं आतीं। बात करें भीलवाड़ा जिले की तो यहां शीतला सप्तमी पर रंग व गुलाल खेला जाता है। घरों में बासी खाना खाया जाता है और लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग-गुलाल खेलते हैं और मेहमानों को भी ओलिया व अन्य बासी सामग्री परोसी जाती है।
यह परंपरा पुराने जमाने से चली आ रही है। भीलवाड़ा के लोगों में होली व धुलंडी का इतना क्रेज नहीं होता जितना शीतला सप्तमी का होता है। होली व धुलंडी पर बाजारों में इतनी भीड़ नहीं दिखी जितनी पिछले दो दिन में दिख रही है। बच्चों व युवाओं में रंग-गुलाल का क्रेज दिख रहा है वहीं कोरोना ने इस पर्व के जोश को काफी हद तक प्रभावित किया है।
बाजार औसत रहा, लेकिन होली से ज्यादा हुई बिक्री
दुकानदारों ने बताया कि भीलवाड़ा जिले के लोगों में होली व धुलंडी का इतना क्रेज नहीं रहता जितना शीतला सप्तमी का। पिछले दो दिन में बिक्री बढ़ी है और बाजारों में रौनक भी दिखी है। बिक्री हालांकि उतनी नहीं है जितनी संभावित थी लेकिन फिर भी बाजार ने निराश नहीं किया।
लापरवाही का दौर जारी
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच लोग कोरोना गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। एक अप्रैल को 51 कोरोना संक्रमित मिलने के बाद प्रशासन व चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया था लेकिन दो अप्रैल को 26 कोरोना संक्रमित मिलने के बाद थोड़ी राहत मिली। अब देखना यह है कि लोग शीतला सप्तमी पर कोरोना गाइडलाइन की कितनी पालना करते हैं। कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन हुआ तो आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढऩे से इनकार नहीं किया जा सकता। बाजार में जहां ग्राहकों ने मास्क नहीं लगा रखे हैं वहीं कई दुकानदार भी इस नियम की अवहेलना करते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा रात 9 बजे बाजार बंद के आदेश की पालना भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। गुरुवार को रात साढ़े नौ से 10 बजे तक कई दुकानें खुली थीं और ग्राहक खरीदारी करते दिखे। 
ऐसे कर सकते हैं बचाव
लोगों को मास्क लगाकर रखना चाहिए जो मुंह व नाक दोनों को कवर करे। दो गज की दूरी जरूर रखें। रंग की बजाय गुलाल से होली खेलें। पानी में भीगने से बचें। स्पर्श करने के बजाय दूर से ही गुलाल फेंके। गले लगने के स्थान पर दिल मिलाएं। हाथों को बार-बार साबुन व साफ पानी या सैनेटाइजर से धोते रहें। भीड़ में शामिल न हों और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखें।

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