आत्मविश्वास सबसे बड़ी शक्ति: आचार्य विजयराज


चित्तौडग़ढ़ (हलचल)। शांत क्रांति संघ के आचार्य विजयराज ने रविवार को गिलुण्ड में आयोजित धर्मसभा में कहा कि संपूर्ण दुनिया विश्वास पर टिकी हुई है। दुनिया में जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं, उन्होंने अपने आत्मविश्वास के बल पर असाधारण प्रगति कर उदाहरण प्रस्तुत किया है। आत्मविश्वास को कभी भी डगमगाने मत देना। यदि आपका आत्मविश्वास गड़बड़ा गया तो फिर आपकी प्रगति अवरूद्ध  हो जाएगी। आत्मविश्वास के कारण ही सकारात्मक सोच के साथ व्यक्ति आगे बढ़ता है और हर असंभव को संभव कर दिखाता है। आत्मविश्वास सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि थोड़ा सा संकट आने पर या नुकसान होने पर आत्मविश्वास डावांडोल हो जाता है। सबसे पहले संकट आने पर धर्म को छोड़ देते है। नुकसान हमारी गलतियों के कारण हुआ है और दोष धर्म को देते है। दुर्घटना हमारी गलती से हुई है और दोष धर्म पर डाल देते है। यह हमारी मानसिक कमजोरी का प्रमाण है। जो धर्म पर विश्वास करता है, वह मानता है कि जो गया है वह मेरा नहीं और जो मेरा है वह गया नहीं। राम एवं कृष्ण तथा महावीर पर कितने संकट आए फिर भी उनका आत्मविश्वास नहीं डिगा। उन्होंने कभी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। हम बहते पानी को रोककर बड़ा बांध बना सकते हैं पर जीवन के प्रवाह को रोक पाना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज युवा पीढ़ी कर्तव्य से भटक रही है। थोड़ी सी उच्च शिक्षा पाकर माता-पिता की सेवा से विमुख हो जाते है जबकि माता-पिता  पुण्य से और पत्नी पसंद से मिलती है। पत्नी के चक्कर में माता-पिता का अनादर करने वाले कभी सुखी नहीं रह सकते। आज की संस्कार विहीन शिक्षा का ही असर है कि माता-पिता पर संतान द्वारा प्रहार की घटनाएं देखने व सुनने को मिलती है तो हृदय द्रवित हो जाता है। ऐसा  प्रत्यक्ष देखने को मिला है कि एक भाई के पास चार बंगले एवं आठ आलीशान गाडिय़ां हैं, पर माता की सेवा नहीं करता तो दूसरा भाई किराए के मकान में रहकर भी माता-पिता की सेवा कर रहा है।

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