योग विद्या में है शोध की अनंत संभावनाएं: प्रो. हरेंद्रसिंह

 


निंबाहेड़ा हलचल न्यूज
योग विद्या में शोध की अनंत संभावनाएं हैं। इसमें ऐतिहासिक, दार्शनिक और प्रयोगात्मक शोध किए जा सकते हैं जिससे समाज को वैज्ञानिक आधार पर लाभ मिलेगा। यह बात चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मुख्य वक्ता के रूप में जुड़े प्रो. हरेंद्र सिंह ने कही। मुख्य वक्ता ने शोध के विभिन्न अर्थों और परिभाषाओं को स्पष्ट किया और योग के किन आयामों पर किस प्रकार की शोध प्रविधि प्रयुक्त की जा सकती है, पर विचार व्यक्त किया। योग विज्ञान विभाग, श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय निंबाहेड़ा द्वारा शनिवार को शोध प्रविधि एवं उसकी कार्ययोजना विषयक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संरक्षक विश्वविद्यालय चेयर पर्सन कैलाशचन्द्र मूंदड़ा ने शोध को देश के विकास का मूल बताते हुए आध्यात्मिक विषयों की शोध प्रणाली के बारे में अवगत कराया। अपने संरक्षकीय उद्बोधन में उन्होंने स्पष्ट किया है कि शोध करने के लिए शोधार्थी को जिज्ञासु होने साथ ही वैदिक ऋषियों के समान स्वयं को समर्पित करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिता शर्मा ने कहा कि श्री कल्लाजी विश्वविद्यालय की स्थापना ही परम पुनीत कार्य वेदों में शोध को मूर्त रूप देने के लिए हुआ है। इस विश्वविद्यालय से जुड़े तथा भविष्य में अधिगमकर्ता शोधार्थियों से आशा और अपेक्षा रहेगी कि वे मौलिक शोध को बल देते हुए अपना शोध कार्य संपादित करेंगे। शोध को लेकर समाज में जो भ्रांतियां हैं उन्हें भी दूर करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह वैदिक विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का भी सिंचन करता है। विषय प्रवर्तन करते हुए योग विभाग से जुड़े लोकेश चौधरी ने शोध का अर्थ उसके स्वरूप तथा महत्व को स्पष्ट किया। कार्यक्रम का संचालन जसबीर द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मृत्युंजय तिवारी ज्योतिष विभाग ने किया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से शोधार्थी जुड़े और अपना ज्ञानवर्धन किया।

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