फंसे लोगों की घर वापसी के लिए रेलवे ने कसी कमर, 11 और स्पेशल ट्रेनों की मंजूरी

 नई दिल्ली (हलचल)। पूरा देश इन दिनों कोरोना वायरस का दंश झेल रहा है। इस महामारी से लडऩे के लिए देश में लॉकडाउन लागू है। वहीं लॉकडाउन में फंसे छात्रों, तीर्थयात्रियों, प्रवासी मजदूरों और पर्यटकों को वापस लाने के लिए रेलवे ने कमर कस ली है। अब तक देश के आठ राज्यों में फंसे उत्तरप्रदेश, झारखंड और बिहार के करीब 11 हजार प्रवासियों को लेकर शनिवार को 10 स्पेशल ट्रेनें रवाना हुईं। वहीं, अब और ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की रेलवे ने मंजूरी दे दी है।
11 और ट्रेनों को मंजूरी
भारतीय रेलवे ने फंसे यात्रियों को वापस लाने के लिए 11 और ट्रेनों को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में और ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, फंसे हुए लोगों को घर वापस लाने के लिए तकरीबन 500 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके लिए 15 दिनों का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे का कहना है कि राज्यों के अनुरोध पर ये सभी ट्रेनें चलाई जाएंगी।
शनिवार को 10 ट्रेनें रवाना हुई
रिपोट्र्स के अनुसार, अब तक 20 ट्रेनें चलाने की योजना बनाई गई हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से शनिवार को झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए 10 ट्रेनें रवाना हुईं। प्रत्येक ट्रेन में करीब 1000 से 1200 तक यात्री थे। बाकी ट्रेनें रविवार को चलाई जाएंगी। पांच श्रमिक स्पेशल ट्रेनें शुक्रवार को चलाई गईं और अब ये रोज चलेंगी। राज्यों की जरूरतों को देखते हुए धीरे-धीरे ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएंगी। यहां बता दें कि शनिवार को केरल से बिहार के लिए दो ट्रेनें चली। इनमें एक तिरूर से और दूसरी एर्नाकुलम से, ये ट्रेनें बिहार के दानापुर तक जाएगी। वहीं, रविवार को राजस्थान के कोटा से बिहार के बरौनी और गया के लिए दो और ट्रेनों को चलाने की योजना है। रविवार को ही एक अन्य ट्रेन बेंगलुरु से दानापुर के लिए रवाना होगी।
नियमों का पालन अनिवार्य
शनिवार को रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन के लिए योजना बनाई है। इस योजना के तहत राज्यों को एक ट्रेन के लिए कम से कम 1,200 लोगों की सूची देनी होगी। ट्रेन में कम से कम 90 प्रतिशत क्षमता को भरना अनिवार्य होगा। यह भी कहा गया है कि ट्रेनें 500 किमी से अधिक दूरी के गंतव्यों के लिए चलेंगी। इसके अलावा जहां से ट्रेनें चलेंगी उस राज्य को खाना और पानी की सुविधा मुहैया करानी होगी। इसके अलावा सभी यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ फेस मास्क भी लगाना अनिवार्य होगा। वहीं, गंतव्य स्थान पर पहुंचते ही यात्रियों को क्वारंटाइन किया जाएगा।
रेलवे के सामने बड़ी चंनौती
रेलवे के सामने बड़ी चुनौती ये है कि जिन स्टेशनों तक ट्रेनें चल रही है उसके आगे तक के यात्री उसमें सफर कर रहे हैं। दरअसल, जब साबरमती से आगरा के लिए ट्रेन निकली तो पता चला कि उसमें बड़ी संख्या में लोग कानपुर से थे और वे चाहते थे कि ट्रेन आगरा से आगे कानपुर तक चले। लेकिन उत्तर प्रदेश और गुजरात के अधिकारियों ने इस संबंध में रेलवे को कोई जानकारी नहीं दी। इसके अलावा सभी राज्य अपने-अपने हिसाब से ट्रेनों की डिमांड कर रहे हैं। लिहाजा, इस सबको देखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई गई है।


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