रामायण में छुपे हैं कोरोना वायरस को हराने के रहस्य, इससे सीखें

 सीकर। कोरोना वायरस को स्टे होम व सोशल डिस्टेंस के जरिए हराने के लिए देशभर में लॉकडाउन जारी है। आमजन घरों में रहकर ही स्टे होम की पालना करें इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से रामायण सीरियल दिखाया जा रहा है। परिवार सहित इसे बड़े चाव से देखा भी जा रहा है। लेकिन, रामायण देखने के साथ यदि हम इससे सबक भी लें, तो अब कोरोना-रावण रूपी राक्षस को हम आसानी से हरा सकते हैं।
रामायण से जुड़े वे प्रसंग, जो आमजन के साथ प्रशासन व चिकित्सकों को भी कोरोना से जीत के मंत्र बता रहे हैं
सोशल डिस्टेंस
रावण को मारने के लिए भगवान राम 14 साल वनवास में रहे। परिवार व समाज से दूर रहकर राम ने इस दौरान किसी नगर में प्रवेश नहीं किया। निषादराज गुह व राज्य प्राप्त करने के बाद सुग्रीव व विभीषण के बुलावे पर भी उन्होंने राज्य में प्रवेश नहीं किया। यह रावण को हराने के मार्ग में एक तरह से सोशल डिस्टेंसिंग थी।
सबक: कोरोना रूपी राक्षस को मारने के लिए हमें भी सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करनी है। अपने अलावा किसी भी दूसरे के घर में प्रवेश नहीं करना है।
गुफा में लॉकडाउन
भगवान राम ने सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया तो बरसात का मौसम शुरू हो गया था। ऐसे में राम ने रावण को पराजित करने से पहले सीता के पतिव्रत पर भरोसा रखते हुए प्रवर्षण पर्वत की गुफा में चातुर्मास किया। चार महीने तक वह भाई लक्ष्मण के साथ पर्वत पर ही रहे। यह एक तरह से खुद पर लागू किया लॉकडाउन था। जिसके बाद सीता का पता लगाकर लंका पर जीत हासिल की।
सबक: रावण पर विजय पाने के लिए जब भगवान राम पर्वत पर हर कष्ट सहते हुए लॉकडाउन में रह सकते हैं, तो घर परिवार के बीच हर सुख सुविधा के बीच हम भी तो खुद को लॉक रख सकते हैं।
लक्ष्मण का तुरंत उपचार
रावण सेना से युद्ध में लक्ष्मण के मूच्र्छित होने पर लापरवाही नहीं बरती गई। हनुमानजी तुरंत वैद्य सुषेण को ले आए। इसके बाद वैद्य के कहे अनुसार सूर्योदय से पहले रातोंरात ही हिमालय से संजीवनी बूटी ले आए।
सबक: कोरोना वायरस के लक्षण मिलने पर हमें भी लापरवाही नहीं बरतनी है। तुरंत चिकित्सक से परामर्श कर समय पर दवा लेनी है।
जरूरतमंद सुग्रीव की मदद
राज्य व पत्नी पाने के लिए सुग्रीव समर्थ नहीं था। ऐसे में राम ने जरुरतमंद सुग्रीव से मित्रता कर मदद की। वनवास के चयन के पीछे भी एक वजह ऋषि-मुनियों के तप व यज्ञ में राक्षसों की बाधा दूर कर उनकी जरूरत पूरी करना था।
सबक: हमें भी लॉकडाउन में जरुरतमंदों का मददगार बनकर उनकी परेशानी दूर करनी है।
भावनाओं पर काबू
वनवास में भाई भरत पूरे परिवार व प्रजा के साथ राम को लेने वन में पहुंचे। जहां सबने उनसे वापस अयोध्या लौट चलने का आग्रह किया। लेकिन, राम भावनाओं में नहीं बहे। भविष्य में रावण की मृत्यु की आवश्यकता पर उन्होंने परिवार व राज्य का मोह हावी नहीं होने दिया।
सबक: लॉकडाउन में पास-पड़ोसी, नजदीकी रिश्तेदार व मित्र से मिलने या बच्चों को थोड़ा बाहर घुमा लाने की भावनाएं उठती हैं। लेकिन, कोरोना की मृत्यु के लिए हमें भी इन भावनाओं- संवेदनाओं को हावी नहीं होने देना है।
पुलिस-प्रशासन के लिए सीख: पहले समझाइश, फिर कार्रवाई
लंका पर चढ़ाई से पहले राम ने समुद्र से रास्ता देने की प्रार्थना की। तीन दिन तक प्रार्थना का असर नहीं हुआ, तो समुद्र देव को दंड देने के लिए उन्होंने धनुष उठा लिया।
सबक: लॉकडाउन का उल्लंघन कर बेवजह घूमने वालों को प्रशासन पहले गुजारिश व समझाइश से घर बिठाए। फिर भी कोई नहीं माने तो फिर कार्रवाई का धनुष उठा लेना ही ठीक है।
चिकित्सकों के लिए सबक: सब रोगी एक समान
लक्ष्मण के शक्ति लगने पर लंका के वैद्य सुषेण को लाया गया। वैद्य ने शत्रु होने पर भी लक्ष्मण के उपचार से इनकार नहीं किया। बल्कि, ठीक कर लक्ष्मण को युद्ध के लायक बनाया।
सबक: चिकित्सक के लिए कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। उपचार के लिए आया हर जाति, पंथ, मजहब व वर्ग का शख्स उसके लिए रोगी है। जिसका उपचार करना ही उसका सबसे बड़ा धर्म है।


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