देखरेख के अभाव में जर्जर होता ऊला सुला बाला जी का मंदिर
मंगरोप(मुकेश खटीक)कस्बे के माता का मंड के समीप स्थित बाला जी महाराज के अदभुद और दुर्लभ दर्शन जो कि एकमात्र मंगरोप गांव में होते है।जानकारी के अनुसार यह मंदिर मंगरोप भीलवाड़ा के मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे पर स्थित है।उत्तर और दक्षिण मुखी वो भी एक ही जगह पर दोनों स्वरूप की प्रतिमाएं स्थापित हो ऐसा कम देखने को मिलता है।ऐसा ही दर्शन लाभ कस्बे के बाहर माता के मंड स्थित मंदिर पर मिलता है।कस्बे वासियों ने हलचल को बताया कि कभी भी ऐसा स्थान कहीं अन्यत्र सुनने में नहीं आया है।करीब 20 वर्ष पूर्व इस मंदिर पर एक सेविका रहती थी।जो यहां पर पूजा अर्चना व मंदिर की सार संभाल का कार्य करती थी।दोनों छोटे मंदिर एक बड़े से चबूतरे पर बने हुए है।चबूतरे पर ही लगता हुआ एक कमरा बना हुआ है।उस समय मंदिर पर चड़ावा भी आता था।जिससे उस सेविका का गुजर बसर होता था।उसके मरणोपरांत स्थानीय संत बालू नाथ ने मंदिर की देखरेख का जिम्मा संभाला था।परन्तु संत के देहांत के बाद करीब दस वर्ष से इनकी देखरेख के अभाव में मंदिर और कमरा दोनों खस्ताहाल की स्थति में है।कमरे का हाल यह है कि वह कभी भी सड़क पर गिरकर किसी बड़े हादसे को अंजाम दे सकता है।
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