राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव, 17 महीने पहले ही चुनावी मुददे तलाशने में जुटी कांग्रेस और भाजपा

 

जयपुर। राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से करीब 17 महीने पहले ही राज्य में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस और भाजपा एक-दृसरे को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। दोनों ही पार्टियां चुनावी मुददों की तलाश में जुट गए हैं। भाजपा अशोक गहलोत सरकार को भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर घेर रही है। करौली उपद्रव, विधायकों द्वारा सरकारी अधिकारियों के साथ मारपीट और दुष्कर्म की घटनाओं को भी मुददा बनाकर गहलोत सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री गहलोत और कांग्रेस 13 जिलों में पेयजल व सिंचाई से जुड़ी ईस्टर्न राजस्थान कैनाल परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट का दर्जा नहीं दिए जाने को लेकर केन्द्र सरकार को घेर रही है। प्रस्तावित यह परियोजना उन 82 विधानसभा क्षेत्रों को लाभ पहुंचा सकती है, जिनमें 2018 के चुनाव में कांग्रेस बहुत कमजोर साबित हुई है। ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री दो बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख चुके हैं। इस मुददे का राजनीतिक लाभ लेने के लिहाज से कांग्रेस ने बुधवार को 13 जिला मुख्यालयों पर केन्द्र सरकार के खिलाफ धरना दिया। राजधानी जयपुर में दिए गए धरने का नेतृत्व जलदाय मंत्री महेश जोशी ने की। जोशी ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर दिल्ली जाकर भी आन्दोलन किया जाएगा। करीब यदि यह परियोजना अमल में लाई जाती है तो साढ़े तीन करोड़ लोगों को पीने का पानी उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने किया ट्वीट

बुधवार सुबह मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्वीट कर कहा, आखिर राजस्थान के साथ केंद्र सरकार भेदभाव क्यों कर रही है। ऊपर से जलशक्ति मंत्री घाव पर नमक छिड़क रहे हैं कि प्रधानमंत्री ने अपनी अजमेर की चुनावी सभा के दौरान ईआरसीपी के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला। जब दूसरे प्रदेशों में चल रही 16 परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना बनाया जा सकता है तो राजस्थान जैसे मरूस्थलीय तथा गहराते जलस्तर और बिना बारहमासी नदियों के राज्य की इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं करना हर किसी के समझ से बाहर है।

यह है परियोजना

ईआरसीपी की घोषणा साल, 2017-18 के बजट में तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने की थी। इसके बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार इसे राष्ट्रीय परियोजना बनाने को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं कर सकी। इस परियोजना से झालावाड़, बारां, बून्दी, सवाई माधोपुर, करौली, दौसा, जयपुर, धौलपुर, भरतपुर, कोटा, टोंक, अलवर और अजमेर जिलों में सिंचाई और पीने के पानी की जरूरत पूरी हो सकती है। इससे 4.31 लाख हेक्टेयर की सिंचाई हो सकेगी। परियोजना 60 हजार करोड़ की है। केंद्र सरकार चाहती है कि राजस्थान सरकार 75 फीसदी खर्च वहन करे। वहीं गहलोत सरकार चाहती है कि केंद्र इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करे, जिससे 90 फीसदी खर्च वह उठा सके और राज्य को 10 फीसदी खर्च ही वहन करना पड़े।

गहलोत और शेखावत में तकरार

जयपुर में पिछले सप्ताह जलसंसाधन को लेकर हुई एक कांफ्रेंस में जोशी ने ईआरसीपी का मुददा उठाया था तो केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने उन्हे यह कहते हुए टोका था कि पीएम ने अजमेर व जयपुर की सभा में इस परियोजना पर एक शब्द नहीं कहा। यदि कहा हो तो वह राजनीति से सन्यास ले लेंगे, नहीं तो सीएम गहलोत राजनीति से सन्यास लेंगे। इस पर गहलोत ने लगातार तीन दिन तक ट्वीट किए और शेखावत को कई बार घेरा।

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