मंगरोप छात्रावास में खेल का नही है मैदान , प्रवेश मार्ग पर अभ्यास करने को मजबूर

 


 मंगरोप(मुकेश खटीक)गांव के राजकीय कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास में प्रतिभागी छात्राओं को आगामी टूर्नामेंट में हिस्सा लेना है लेकिन छात्रावास में पर्याप्त मैदान नही है।ऐसा नहीं है की छात्रावास में जमीन नहीं है।लेकिन अधिकांश जगह पर चट्टाने है।छात्रावास के पूरे मैदान पर बड़ी बड़ी चट्टाने और बड़े बड़े झाड़ उगे हुए है जिससे जहरीले जीव जंतुओं का भय बना रहता है।कुछ माह पूर्व हुए भवन निर्माण के दौरान इन चट्टानों को तोड़कर भवन निर्माण में उपयोग लेने के लिए जनप्रतिनिधियों ने सुझाव भी दिया था और थोड़ी सी जगह से पत्थर निकालने का कार्य भी प्रारंभ किया था लेकिन ठेकेदार ने इस तरह पत्थर निकाल कर निर्माण कार्य में उपयोग लेने को लेकर महंगा पड़ना बताकर यहां से पत्थर निकालने का कार्य बन्द कर दिया।कई बार उच्च अधिकारियों को इस गम्भीर समस्या से अवगत करवाया गया लेकिन उच्च अधिकारियों ने भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।इसके फलस्वरूप आज छात्राओं को क्रीड़ा अभ्यास के लिए अपर्याप्त स्थान पर खेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।वार्डन विनीता खोईवाल ने बीएचएन को बताया की छात्रावास में 100 छात्राओं का नामांकन है।छात्राओं में खेलकूद प्रतियोगिताओं को लेकर खासा उत्साह है।लेकिन यहां पर अभ्यास करने के लिए कोई खास प्रबन्ध नही होने से बालिकाएं प्रतियोगिता की तैयारी को लेकर घबराई हुई है की अभ्यास अच्छी तरह नही हो पाया तो कहीं प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगी।जिला स्तरीय खेलकूद एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओ का आयोजन इस माह की 27 तारीख से 29 तक होगा जिसमे कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास की कक्षा 9 से 12 वीं की छात्राएं भाग लेगी जिसमे विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी कबड्डी,भाला फेंक,गेंद फेंक,बॉलीवाल,टेनिस आदि।यह कैसी विडम्बना है की जहा एक तरफ सरकार खेलकूद प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कर रही है वहीं छात्रावास की बालिकाओं के लिए खेलकूद प्रतियोगिताओं की तैयारी करने के लिए मैदान ही नही है अपितु उन्हे अभ्यास करने के लिए आज छात्रावास में प्रवेश मार्ग जो की खेलने के हिसाब से बहुत ही अपर्याप्त जगह है वहा पर खेल कर तैयारी करने की नोबत आन पड़ी है।छात्राओं के अभिभावक अपनी बेटियों के खेल विकास को लेकर चिंतित रहते है की कहीं हमारी बेटियां खेलकूद प्रतियोगिताओं में पिछड़ न जाए।छात्रावास में मैदान का न होना आज बेटियों का खेल के प्रति मनोबल तोड़ता हुआ नजर आ रहा है। 

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