विद्युत निगमों में लागू करे राज्य सरकार पुरानी पेंशन योजना नहीं तो करेंगे अनिश्चित कालीन आंदोलन

 


भीलवाड़ा ।  राजस्थान राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के नेतृत्व में अजमेर विद्युत वितरण श्रमिक संघ भीलवाड़ा के बैनर तले 1300 कर्मचारी एक साथ होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे राज्य सरकार द्वारा बजट 2021-22 की घोषणा में राज्य के समस्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए घोषणा की है लेकिन अभी तक राज्य सरकार व प्रशासन किसी भी तरह से विद्युत विभाग में कार्यरत कर्मचारियों व अधिकारियों को पेंशन देने मैं कोई दिलचस्प नजर नहीं आ रहा है गोल मटोल रवया अपना रही है।
                    नरेश कुमार जोशी जिला महामंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 2004 के बाद के सभी राज्य कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम की घोषणा की गई है परन्तु विद्युत विभाग (पाचो निगमों) में कार्यरत कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ नहीं दिया जा रहा है इस संदर्भ में निगम प्रशासन व राज्य सरकार को निरंतर पत्रों के माध्यम से एवं संगठन के प्रतिनिधि मंडल द्वारा माननीय सरकार व विभाग को निरंतर आग्रह किया जा रहा है परन्तु सरकार द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ द्वारा विद्युत प्रशासन को इस विषय में यह भी अवगत करवाया जा चुका है कि निगम प्रशासन ने समंवय समिति के स्तर पर निर्णय लेकर 01.01.2004 के बाद नियुक्त कार्मिकों पर RVPN F&R No. 247 दिनांक 05.11.2004 द्वारा NPS लागू की गई थी। जिसके बाद में कतिपय कारणों से संमवय समिति में ही निर्णय लेकर RVPN F&R No. 291 दिनांक 22.09.2005 द्वारा सीपीएफ स्कीम में बदल दिया गया।
                    राज्य सरकार, निगम प्रशासन से कई बार निवेदन भी किया गया की पुरानी पेंशन योजना (OPS) सरकार द्वारा समस्त विभागों में लागू की गई है उसे बिजली विभाग (पांचों निगमों) में भी लागू कर बिजली कर्मचारियों को राहत प्रदान करवाने के लिए आदेश पारित करवाने की कृपा करावें ताकि कर्मचारी बिना मानसिक तनाव के साथ आमजन राज्य के विकास में उद्योग को निर्वाध विद्युत आपूर्ति की सेवाऐं निरंतर प्रदान कर सके निगम में निजीकरण को दे रही है राज्य सरकार बढ़ावा जबकि आम जनता से हो रही है विद्युत बिलों में हो रही है कई बार की जा चुकी है। फ्यूल सरचार्ज के नाम पर वसूली भीलवाड़ा की जनता सिक्योर मीटर सिक्योर मीटर के नाम से एमबीसी मॉडल के तर्ज पर दिया गया लेकिन पूरे रूप से भीलवाड़ा मॉडल असफल रहा भीलवाड़ा की जनता आज भी परेशान है आए दिन दफ्तर के चक्कर काट काट के कोई सुनने वाला नहीं है। बरसात का तो हाल पूछो ही मत साहब शहर का यह हाल है तो गांव का क्या होगा अगर गांव में भी निजीकरण हुआ तो भीलवाड़ा सीकर मीटर के हाथ देने के बाद और बढ़ रहा है टीएनडी लॉस लेकिन अधिकारियों की मिली भगत से निगम नहीं कर रहा है सिक्योर मीटर से वसूल भीलवाड़ा जिले में चल रहे हैं लिफ्ट लोडर ए आर टी में हो रही हो रहे भ्रष्टाचार भीलवाड़ा के भीलवाड़ा वृत के अधीनस्थ ग्रामीण उपखंडों में चल रही एक एफआरटी का खर्च 1.82 लाख और एक उपखंड में कम से कम 3 एफआरटी और पूरे वृत में 56 एफआरटी चल रही है निगम शर्त अनुसार यह कार्य नहीं कर पा रही है क्योंकि सब कमीशन का खेल चल रहा है उपभोक्ता आज भी परेशान है।
                    निगम में निरंतर अलग-अलग नामों से निजीकरण किया जा रहा है जो कि निगम हित में नहीं है ती आम उपभोक्ताओं को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली, चिकित्सा, शिक्षा पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है परन्तु सरकार निगमों को निजी हाथों में देकर आम जनता के साथ धोखा कर रही है। जब विद्युत मंडल का सन् 2000 में विघटन किया गया तब विद्युत मंडल का घाटा कम था परन्तु जब निगमों को पांच भागों में बांटा गया है उसका लाभ नहीं हुआ बल्कि घाटा निरंतर बढता जा रहा है। निगम प्रशासन द्वारा लाभांश वाले शहरों को निरंतर निजी हाथों में देकर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है जितनी भी सरकार संपत्ति हैं वह सरकार की नहीं आम जनता की है अतः बिजली निगमों के निजी हाथों में देने के विषया पर विचार करना अतिआवश्यक है। आपको ज्ञात है कि बिजली के कर्मचारियों द्वारा जब पूरा प्रदेश कोरोना काल में भयंकर संघर्ष कर रहा था उस समय बिजली के प्रत्येक कर्मचारी ने अपनी जान जोखिम में डालकर भी सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर आर्थिक व शारीरिक रूप से पूर्ण सहयोग किया तथा जितने भी निजी संस्थान और उद्योग थे उन्होंने अपने उद्योग बंद कर किसी प्रकार का सरकार का सहयोग नहीं किया। पूरे प्रदेश में बेरोजगार बैठे विद्युत से संबंधित शिक्षित युवाओं को भर्ती कर रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है एवं नियमानुसार स्थाई प्रकृति का कार्य स्थाई कर्मचारियों से ही कराया जाना चाहिए परन्तु सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है अतः निगम को घाटे से बचाने व निगम के बेशकीमति संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए निगम को निजी हाथों में बेचना तर्कसंगत नहीं है विद्युत अति आवश्यक विभी है सरकार के अंतर्गत रखना चाहिए क्योंकि देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में विद्युत की महत्वता अति महत्वपूर्ण है। अतः राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ आपसे मांग करता है कि डठ पर दिए जा रहे जोधपुर, पाली, चित्तौडगढ़, निंबाहेडा और पूर्व में दिए गए जिलों के निजीकरण को तुरन्त प्रभाव से नहीं राका गया तो पूरे प्रदेश में विद्युत कर्मचारियों को आंदोलन की राह पर जाने को मजबूर होना पडेगा।
                    इस मौके पर राजस्थान प्रदेश उपाध्यक्ष जुम्मा काठात, जिलाध्यक्ष हरीश सुवालका, जिला महामंत्री नरेश कुमार जोशी , संयुक्त महामंत्री संतोष मीणा, सम्भू तेली, जगदीश  वैष्णव, कोषाध्यक्ष इकबाल चूड़ीगर ,फिरोज ख़ान , सूर्यप्रकाश लखारा, ऋषिकेश (बिजोलिया), प्रकाश (गंगापुर), निर्मल , लालचन्द ( बनेड़ा) महेंद्र (बिजोलिया) बनवारी, दिनेश जांगिड़, संजय टेलर, मुरली विजय, राजेश, उषा माली, भेरू बैरवा, सावरमल जाट, आदि उपस्थित थे।

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