भीतर का क्षमा गुण समाप्त हो जाने पर बाहर के झगड़े नहीं हो सकते समाप्त-समकित मुनि

 


भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी 
भवन में लगी आग को पड़ौसी या फायरबिग्रेड बुझा सकते है लेकिन भीतर के भावों में जो आग लगी है उसे ये नहीं बुझा पाएंगे। समस्याएं बाहर नहीं भीतर है। भीतर की समस्याएं खत्म हो जाए तो बाहर कोई समस्या नहीं होगी। भीतर की अग्नि शांत होने पर बाहर आग लगा ही नहीं पाएंगे। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शांतिभवन में बुधवार को शांतिभवन में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि हम चीजों के भाव तो देखते है लेकिन इंसान के भाव देखना बंद कर देने से परिस्थितियां बिगड़ती जाती है। रावण को लगता था राम उसके दुश्मन है जबकि रावण का दुश्मन उसका मन था जिसे वह मना नहीं पाया। जो अपने मन को मना लेता है दुनिया उसको खिलाती है ओर जो नहीं मना पाता उसे दुनिया मना कर जाती है। उन्होंने कहा कि भीतर का क्षमा गुण समाप्त हो जाने पर बाहर के झगड़े कभी समाप्त नहीं हो पाते है। बाहर झगड़ा है लेकिन समस्या की जड़ भीतर है। भीतर समस्याएं रहने पर बाहर स्थाई समाधान नहीं मिल सकता। ऐसा करने के लिए भीतर की समस्याएं खत्म करनी होगी। मुनिश्री ने कहा कि हर व्यक्ति की कोई न कोई कमजोरी अवश्य होती है। किसी को नियंत्रित व काबू में करने के लिए उस कमजोरी को समझना आवश्यक है। धर्मसभा के शुरू में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने प्रेरक गीत ‘‘ आओ मिलकर विचार करें’’ पेश किया। धर्मसभा में प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य रहा। धर्मसभा में कोलकात्ता, नाथद्वारा आदि स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं भी मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत एवं धर्मसभा का संचालन शांतिभवन श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेन्द्रप्रसाद चीपड़ ने किया।

 भावों में लालच की आग होने से अंदर की पवित्रता नष्ट 

पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि भीतर के भाव बदलते ही आगे के भव बदल जाते है। भावों में लालच की आग लगी होने का परिणाम है कि भीतर की पवित्रता नष्ट होती चली जाती है। लालच,क्रोध, अभिमान व माया की अग्नि साधारण नहीं ये तो आत्म गुणों को जलाकर राख कर देती है। कषाय की जड़ हरी-भरी होने पर बाहर लालच व क्रोध के झगड़े कभी खत्म नहीं हो पाते है। हम कषाय की इस हरी भरी जड़ को समाप्त करना होगा ताकि बाहरी क्लेश व तनावों से मुक्ति पा सके। 

 शिवाचार्य जयंति 18 सितम्बर को मनाएंगे तप-त्याग के साथ 

पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने बताया कि 18 सितम्बर को श्रमण संघीय आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनिजी म.सा. की जयंति तप-त्याग आराधना के साथ मनाई जाएगी। श्रमण संघीय महामंत्री पूज्य सौभाग्यमुनिजी म.सा. की द्वितीय पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 25 सितम्बर को सामूहिक सामायिक आराधना होगी। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाएं इन कार्यक्रमों में सहभागिता निभा धर्म आराधना का लाभ ले।

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