बांगड़ ने अछूत कर दिया भीलवाड़ा के लोगों को...

 
भीलवाड़ा का नाम सुनते ही अब अड़ौसी-पड़ौसी ही नहीं, बल्कि प्रदेश, देश और विदेश में भी लोग अब यहां के लोगों को अछूत समझने लगे हैं। बृजेश बांगड़ अस्पताल से कोरोना के विस्फोट ने भीलवाड़ा को ही अछूत बना दिया है। लोग 11 दिन से कफ्र्यू झेल रहे हैं और अब कितने ही दिन और उन्हें ऑल डाउन के चलते कैद रहना पड़ेगा, जिसे लेकर लोगों को खास गुस्सा है। 
चीन से उठी कोरोना की चिंगारी ने कपड़ा नगरी भीलवाड़ा में भी जबरदस्त आग लगाई है। यह आग नहीं, लगती अगर बांगड़ अस्पताल के चिकित्सक थौड़े से सजग होकर सच बोल जाते, लेकिन नोटों की खनक के आगे पूरे भीलवाड़ा शहर को कोरोना के हवाले कर देने वाले इस अस्पताल के चलते हालात गंभीर बने है। लोग घरों में कैद है और उन्हें कितने दिन तक घरों में रहना होगा, यह कहा नहीं जा सकता। आज हालात यह हो गये कि पड़ौसी से पड़ौसी इसलिये नजर नहीं मिला पा रहा है कि वह कहीं हाथ न मिला ले और चाय पीने कहीं घर में न आ जाये। ये ही नहीं, जिनकी रिश्तेदारी और बेटे-बहू और दोहिते बाहर हैं, वो भी अब अपने परिजनों से अछूत सा व्यवहार करने लगे हैं। एक सभ्य परिवार की दादी ने यह कहते हुये कि उसके पौते-पौती के पास वह नहीं जा सकती। वो बॉम्बे में रहते हैं। अब उन्हें वहां अछूत सा समझा जा रहा है। उस कॉलोनी के लोग बेटे-बहू को यह कह रहे हैं कि भीलवाड़ा से कोई आ तो नहीं रहा है। ये ही नही कपड़ा बाजार को भी बांगड़ कोरोना बम ने बरसों पीछे धकेल दिया है और एक व्यापारी ने तो यहां तक कहा कि बाहर से अब व्यापारी भी यहां आने वाले नहीं है। इस बीमारी के बाद बाहर से खरीदारी के लिए कोई फोन तक नहीं आया है। जबकि पहले सप्ताह में कई फोन आते थे। ये ही स्थिति रही तो भीलवाड़ा का कपड़ा भी अछूत हो जायेगा और उनका कारोबार बर्बादी के कगार पर पहुंच जायेगा। 
अछूत का तमंगा पा चुके भीलवाड़ा में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। इस अछूत के तमंगे को धोने के लिए चिकित्सा महकमा पूरी तरह जुटा हुआ है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मुश्ताक खान, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजन नंदा और पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ के नेतृत्व में बाहर से आये चिकित्सक कोरोना पीडि़तों के इलाज में जी-जान से जुटे है। इसी का परिणाम है कि 26 में से 11 पॉजिटिव मरिज नेगेटिव हो गये हैं। वहीं जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट भी अपनी टीम के साथ ही भीलवाड़ा पर लगे कलंक को धोने के साथ ही लोगों की जिंदगियां बचाने में जुटे है। इसमें पुलिस कप्तान और महकमा भी इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। 
भीलवाड़ा पर अछूत के कलंक को धूलने में अभी वक्त लगेगा। चर्चा तो यह भी है कि अब भीलवाड़ा के लोगों को अन्य शहरों में हीन भावना से देखा जायेगा। ऐसी स्थिति में लोगों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा हो सकता है। इससे के पीछे बांगड़ अस्पताल का अहम लापरवाही रही है। जिससे भीलवाड़ा तबाह होने में कोई कसर नहीं बची है। लोगों में इस तरह की खासी चर्चा ही नहीं, बल्कि उनमें गुस्सा भरा पड़ा है...?


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