जागरूकता और सुरक्षा हो और कड़ी

चीन के वुहान शहर से उठा कोरोना वायरस के बवंडर ने विश्वभर की अर्थव्यवस्था के साथ ही जनजीवन को झकझोर दिया है लेकिन इस बवंडर से भारत अभी सुरक्षित है परंतु जागरूकता और सुरक्षा की अभी और जरूरत है जिससे इसे पूरी तरह काबू में किया जा सके।
भारत सरकार के साथ ही देशभर के चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी इस बवंडर पर काबू पाने के प्रयास में जी-जान से जुटे हैं लेकिन इस वायरस की अभी विश्व में किसी के पास कोई दवा नहीं है। सुरक्षा और बचाव ही एकमात्र उपाय है। सरकार ने उपाय तो सभी किए हैं लेकिन कुछ कमियां इस बवंडर में आग में घी का काम कर रही हैं। सब कुछ ठीक है लेकिन भारत में कुछ लोगों के कारण ही इस बीमारी ने प्रवेश किया है। अगर सिपहेसालार कुछ दूरदर्शिता अपनाते तो इससे भी बचा जा सकता था। विदेश से जितने भी लोग आए हैं या आ रहे हैं, उन्हें विदेशों की तर्ज पर घर तक नहीं पहुंचने देकर ऐहतियातन ऑब्जर्वेशन रूम में निर्धारित अवधि तक रखा जाता ताकि बाहर से वायरस लेकर आने वाले लोग अपने परिजनों व आसपास के लोगों के संपर्क में नहीं आते और वायरस के संक्रमण की आशंका निर्मूल हो जाती। अब भी वक्त है, बाहर से आ रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, यह सबसे बड़ा कदम और प्रयास हो सकता है।
वायरस के चलते शिक्षण संस्थान, सिनेमाघर, मॉल, जिम, पब आदि को बंद नहीं कराना पड़ता और जो खर्चा अब बचाव के लिए करना पड़ रहा है, उसका कुछ हिस्सा ही बाहर से आने वाले लोगों की निगरानी और उपचार पर होता और इससे न जिम बंद होते, न ही शिक्षण संस्थान और न ही सिनेमा हॉल।
देश में चिकित्सा क्षेत्र में पहले ही डॉक्टरों और नर्सों की कमी है और वर्तमान हालात में यह संकट वाली बात है। 31 मार्च को कई चिकित्सक और नर्सेज सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्साकर्मियों को एक्सटेंशन दिया जाए ताकि चिकित्सा महकमा कमजोर न हो।
वायरस का फायदा उठा रहे दुकानदारों और निर्माताओं पर भी सख्ती से लगाम कसे जाने की जरूरत है। सेनेटाइजर और मास्क के दाम अचानक उछले हैं। इन पर लगाम लगाने की बात तो कही जा रही है लेकिन लगाम कौन लगाएगा। जिन पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी है, वे तो ऐसे दुकानदारों से प्रतिवर्ष निर्धारित सुविधा शुल्क वसूलते हैं। ऐसे मौकों पर उन सरकारी कारिंदों को भी मानवता दिखानी चाहिए और महामारी के इस दौर में लूट-खसोट रोकनी चाहिए।
प्रशासन को अभी से सावचेत हो जाना चाहिए। कोरोना वायरस का महाबवंडर अगर नहीं थमता है तो आने वाले दिन और भी भयावह हो सकते हैं। अभी तो सेनेटाइजर और मास्क की मारामारी हो रही है लेकिन ट्रेनें बंद होने, यातायात के साधन प्रभावित होने और अन्य हालात बनते हैं तो फिर खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती है। इनकी कमी आ सकती है क्योंकि कुछ व्यापारी ऐसी चीजों की कालाबाजारी के लिए उनका स्टॉक करने लगे हैं। आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के प्रयास सरकार व प्रशासन को अभी से पुख्ता कर लेने चाहिए। 


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