जो माता-पिता का नहीं वो राष्ट्र का नहीं- मोरारी बापू

प्रयागराज। अरैल घाट पर चल रही राम कथा "मानस अक्षयवट" का आठवां दिन शनिवार भी भक्ति, उल्लास और जय सिया राम के नाम रहा। सन्त कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित राम कथा में मोरारीबापू ने वाल्मीकि आश्रम में स्थित सीता वट की महिमा बताई। मोरारीबापू ने कहा कि तुलसीदासजी उत्तरकाण्ड के कवितावली में बताते हैं कि जिस आश्रम में वाल्मीकि रहा करते थे वहां माँ जानकी का वट वृक्ष सीता वट है। इस वटवृक्ष की बड़ी महिमा है। हर वट वृक्ष शिव स्वरूप है, लेकिन सीता वट "राम" स्वरूप है। इसके पत्तों में प्रभु सोते हैं। बापू कहते हैं कि कल्पतरू धर्म, अर्थ और काम ही देता है लेकिन सीता वट धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देता है। सीता वट योगपीठ है, प्रेम पीठ है, वैराग्य पीठ है। यह वट राम भक्तों के लिए महिमामयी है। 


जो महान है वह अक्षयवट, जो अहंकार नहीं करे, वह अक्षयवट


मोरारीबापू ने कहा कि दोहावली में अंकित है कि वट वृक्ष पर फूल नहीं लगते हैं। वह फूलता नहीं है। वट वृक्ष के सप्तांग में फूल नहीं है। वट वृक्ष वह है जो अहंकार नहीं करता है। अक्षयवट भी अहंकार नहीं करता है, अक्षयवट महान है। इसकी जितनी जड़े ज़मीन के अंदर जाती है, फैलती है उतना ही वह ऊपर उठता है। बापू कहते हैं कि इसी प्रकार जिस व्यक्ति की जड़े गहरी होती है, वह कभी अहंकार नहीं करता है। उसकी प्रतिष्ठा बड़ी है। वह अंदर से फूलते नहीं है, उनमें अहंकार नहीं आता है। छोटी जड़ों वाले लोग फूलते है, जिसकी प्रतिष्ठा आसमान को छू रही है, वह अहंकार नहीं करते हैं। बापू कहते हैं कि सीता वट सत्य वट है। वृंदावन का वंशीवट प्रेम वट है और कैलाश का शिव वट करुणा वट है। 


हर यंत्र, ग्रंथ उसके मास्टर की प्रतीक्षा करता है, मुझे पढ़ों


मोरारीबापू ने कहा कि हर वाद्य उसके मास्टर की प्रतीक्षा करता है। इसी तरह मानस ग्रंथ भी प्रतीक्षा करते हैं कि आओ मुझे पढ़ों, पढ़ नहीं सकते तो स्पर्श करो और स्पर्श भी नहीं कर सकते हो तो मुझे देखो। बापू कहते हैं कि चौपाइयां मानस के गायकों की प्रतीक्षा करती हैं। हर घुंघरू कहता है मुझे पहनो और नृत्य करो, हर बंशी कहती है मुझे अधर पर लेकर मुझसे राग छेड़ो। बापू कहते हैं कि इसमें पैसों का लोभ मत करना, यह साधना है।  बापू ने कहा कि अगर मैं 10 दिन कथा न करूं तो मानस मुझसे कहती है कब गाओगे। बापू ने यह भी कहा कि अनुभव एक क्रिया है, अनुभूति सहज क्रिया है। अनुभव आपको करना पड़ेगा, यह क्रिया युक्त का परिणाम है जबकि अनुभूति निजी क्रिया का परिणाम है। बापू कहते हैं कि गंगा सहज योग है, साधु सहज बहता है। विश्व के तमाम सद्गुण हमारे अंदर मौजूद है। अनुभव वर्षों का आता है, अनुभूति क्षणिक है। बापू ने कहा कि अच्छा ग्रंथ, पंथ, स्वर, सूर, वाद्य, नृत्य, आचार-विचार सत्संग के समान है। सद्ग्रन्थ का घराना अलमारी नहीं, हमारा अन्तःकरण है। 


भारत का भाग्य, अब राम जन्म भूमि का न्याय हुआ


मोरारीबापू ने कहा कि राम जन्मभूमि के लिए कितने साल निकल गए। अब यह भारत का भाग्य है कि अब जाकर राम जन्मभूमि पर फैसला हुआ है। अब जाकर यह विवाद टला और निर्णय हुआ। बापू ने कहा कि शायद अब जाकर एक - दो महीने में सुनने को मिले कि भूमि पूजन हो रहा है। बापू ने कहा कि हमें बड़ों का आदर करना चाहिए, वट ब्रह्मचारी है, वट बड़ा है। वट का आदर करो। घर में जो बड़े है, उनका आदर करो। अपने घर में काम करने वालों का आदर करो।  बापू ने कहा कि जो अपने माँ-बाप के नहीं है, उनसे राष्ट्र क्या अपेक्षा करेगा। 


क्रोध आने पर मुँह धो लो, दर्पण देखो, धीरज रखो, वक्त लो


राम कथा में मोरारीबापू ने कहा कि क्रोध आने पर ठंडे पानी से मुँह धो लेना चाहिए। हमें वक्त लेना चाहिए। शांत रहना चाहिए। क्रोध एक अंधेरा है, जिसमें दिखाई नहीं देता है। थोड़ा वक्त लीजिए, तुम संवर जाओगे, विवेक जाग जाएगा। क्रोध आने पर थोड़ा रुकिए, यह तपस्या है। बापू कहते हैं कि क्रोध आने पर खुद को दर्पण में देखें, आप खुद में असुर पाओगे। क्रोध में अपने इष्ट को याद करो, हरिनाम लो। क्रोध जिसकी वजह से आ रहा है उसका तिरस्कार मत करो, उसे स्वीकार करो। 


बच्चों को मोबाइल नहीं, मम्मी की जरूरत, हिंसा मत करो


मोरारीबापू ने कहा कि अपने बच्चों को एक उम्र तक मोबाइल मत दो। बच्चों को मोबाइल की नहीं, मम्मी की जरूरत है।  माँ को किट्टी पार्टी में जाना होता है, बच्चे के लिए वक्त नहीं है, बच्चों को समय दीजिए। हम इतने पाश्चात्य क्यों होते जा रहे हैं। तुम्हारे पास अपनी संस्कृति है। मूल सभ्यता मत भूलो। बच्चों को हिंसा वाले सीरियल मत दिखाओ, बच्चों को रामायण दिखाओ। बापू ने कहा कि आपके बच्चे इंग्लिश में पढ़ते है, मैं स्वीकार करता हूँ कि इंग्लिश विश्व की भाषा है, लेकिन मातृभाषा को मत भूलो। बच्चों को हिंदी वर्णमाला भी सिखाओ। बापू ने कहा कि बच्चे को सुबह जल्दी उठा दिया जाता है स्कूल जाने के लिए, उसे सोने दो। उस पर हिंसा मत करो। स्कूल वालो को बोलो की स्कूल थोड़ा देर से खोले। 


स्वयंवर की सुनाई कथा, सियाराम का हुआ विवाह


"मानस अक्षयवट" के दौरान मोरारीबापू ने श्रोताओं को राम स्वयं वर की कथा सुनाई। बापू ने बताया कि किस प्रकार 9,999 राजाओं के द्वारा प्रयास के बाद धनुष नहीं टूट पाया था। जनक के द्वारा धरती को वीर विहीन कहने पर लक्ष्मण का क्रोधित हो जाना और राम के द्वारा धनुष को तोड़ने, राम-सीता विवाह की कथा को बताया। इससे पूर्व बापू ने सीता के द्वारा राम को बगीचे में घूमते देखना और अपनी माँ से इसकी चर्चा करने के बारे में सुनाया।


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