नजरिया : 29 मार्च को बृहस्पति के मकर में आते ही खत्म होगा

सद्गुरु स्वामी आनंद जी


कोरोना जैसी महामारी क्यों फैलती है, इस पर ज्योतिष शास्त्र का अपना नजरिया है. आकाश मंडल का हर ग्रह और हमारी देह का प्रत्येक तत्व भिन्न या विचित्र स्थिति में होने अथवा असंतुलित होने पर तनाव का कारण बनता है. जो ग्रह एक साथ मानव सभ्यता के बड़े हिस्से पर असर डालता हैं, वो हैं शनि, बृहस्पति और मंगल. शनि, राहु और केतु ये तीनों ग्रह अप्रत्याशित परिणामों के जनक माने जाते हैं. शनि जब-जब स्वराशि यानी मकर में आता है, तब-तब विचित्र स्थितियां पैदा करता है. शनि दुनिया में बड़ी महामारियों का गवाह रहा है. इतिहास की बात करें, तो साल 165 ईसवी में जब शनि मकर में प्रवेश किया था, तब इतालवी प्रायद्वीप में चेचक के संक्रमण से 50 लाख लोगों की मौत हुई थी.


साल 252 में जब शनि मकर में पहुंचा, तो कहा जाता है कि ‘प्लेग ऑफ साइप्रियन’ के प्रकोप से रोम में महीनों तक हर रोज औसतन 5,000 लोगों की मौत होती रही. साल 547 में जब शनि अपनी स्वराशि में पहुंचे, मिस्र से बूबोनिक प्लेग फैला, जिसे ‘प्लेग ऑफ जस्टिनियन’ कहा गया. यह वहां से फैलते हुए कुस्तुनतुनिया पहुंच गया, जो एक ऐतिहासिक शहर है. यह रोमन बाइजेंटाइन और उस्मानी साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी. बाइजेंटीनी इतिहास लेखक प्रोसोपियस के अनुसार, तब प्रतिदिन 10,000 से अधिक लोगों की मौत हो रही थी.


1312 में जब शनि ने अपने घर में पग धरा, यूरोप से प्लेग ने वापसी की और इसके कहर से दुनिया भर में 7.5 करोड़ लोगों के मरने का अनुमान लगाया गया, जिसे ब्लैक डेथ कहा गया. प्लेग से 1344 से 1348 के बीच भूमध्य सागर और पश्चिमी यूरोप तक दो-तीन करोड़ यूरोपियों के मरने का अनुमान था, जो उनकी कुल जनसंख्या का एक तिहाई हिस्सा था. शनिदेव तब भी स्वराशि में ही थे. 1666 का ग्रेट प्लेग ऑफ लंदन तब एक लाख लोगों की मौत का कारण बना था जो तब लंदन की 20 प्रतिशत आबादी थी. शनि तब भी अपनी राशि में लंगर डाले हुए थे.


19वीं सदी के मध्य में चीन से तीसरी वैश्विक महामारी ने सिर उठाया, जिससे केवल भारत में एक करोड़ लोगों की मौत हो गयी थी. 1902 में अमेरिका के सैनफ्रांसिस्को से शुरू होकर वहां पहली बार प्लेग का कहर बरपा. तब भी शनि अपने ही घर में चलायमान थे. यहां तक कि गुजरात के सूरत में जब 1994 में प्लेग की आफत आयी, तब भी शनि अपनी ही राशि में थे.


चार मई से विश्व में आयेगी नकारात्मकता में कमी, शुभ फलों में होगी वृद्धि


कोरोना के समय भी मकर में है शनि : इस समय जबकि कोरोना वायरस की महामारी फैली हुई है तब भी शनि स्वयं की राशि मकर में ही चक्रमण कर रहे हैं. 15 मार्च से सूर्य का राशि परिवर्तन कुछ राहत देने की नाकाम कोशिश करेगा. मंगल अभी गुरु राशि धनु में चलायमान हैं. लेकिन 22 मार्च को जब मंगल शनि की स्वराशि मकर में चरण रखेगा, तब वह मानव सभ्यता को और बेचैन करेगा. शनि के संग युति करके इस महामारी के साथ कोई और अप्रिय खबर लायेगा. यह योग किसी दुर्घटना के साथ प्राकृतिक आपदा से जान-माल की हानि का संकेत दिये जा रहा है.


29 मार्च से शुरू हो रहा अनुकूल समय : 29 मार्च को शाम 7.08 बजे बृहस्पति का मकर राशि में प्रवेश शनि-मंगल के साझा उबाल पर पानी डाल देगा. शनि-बृहस्पति की युति मौजूदा भयावह परिदृश्य में ठंडी बयार की तरह आयेगी और मानव सभ्यता के जख्मों पर मरहम लगायेगी. कहा जा सकता है कि 29 तारीख से कोरोना महामारी की मारक क्षमता में कमी आयेगी. 4 मई को शाम 7.59 बजे जब मंगल शनि से पिंड छुड़ायेगा और कुंभ राशि में जायेगा, तब विश्व की नकारात्मकता में सहसा कमी आयेगी और शुभ फलों में वृद्धि होगी. मई के मध्य में परिस्थितियां बदल जायेंगी और इस महामारी का अंत एक झटके में हो जायेगा.


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