अब प्रोसेस हाउसों ने गुवारड़ी बांध को प्रदूषित करने की दिशा में बढ़ाया कदम, टैंकरों से डाल रहे है दूषित पानी व स्लज

 


भीलवाड़ा (प्रहलाद तेली/हलचल)। एक ओर तो सरकार गुवारड़ी बांध को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की ओर कदम बढ़ा रही है। दूसरी ओर कुछ प्रोसेस हाउस संचालक चोरी छिपे बांध पेटे में काला पानी छोड़कर बांध को खराब करने में लगे है। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के कैमरे इस चोरी को पकड़ नहीं पा रहे है। 
जानकारी के अनुसार गुवारड़ी बांध के पेटा क्षेत्र के एकांत इलाके में एक बड़ा खड्डा किया गया है जिसमें रात्रि के अंधेरे में प्रोसेस हाउसों के टैंकर अपने यहां से निकलने वाले दूषित और काले पानी के साथ ईटीपी स्लज को डम्प कर रहे है। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल ने गुवारड़ी नाले और आस पास के क्षेत्र में लोगों की शिकायतों के बाद कैमरे लगा दिये थे जिससे यहां तो अब इस समस्या का समाधान हो गया लेकिन प्रोसस हाउस मालिकों ने इसका तोड़ निकालते हुए अब नाले की जगह गुवारड़ी बांध में ही अपना मलबा फैंकना शुरू कर दिया है। 
सुवाणा पंचायत समिति के उप प्रधान और कांग्रेस नेता श्यामलाल गुर्जर ने कहा कि प्रोसेस हाउस मालिक गुवारड़ी बांध के पेटा क्षेत्र में दूषित काला पानी और स्लज डालकर इसे प्रदूषित करने में लगे है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर तो जहां सरकार ने इसे पर्यटन क्षेत्र में विकसित करने के लिए ढाई करोड़ रुपए स्वीकृत किये है। वहीं दूसरी ओर बांध के पानी को प्रोसेस हाउस संचालक जहरीला कर जानवरों के पीने लायक भी पानी को नहीं छोड़ रहे है। उन्होंने बताया कि जहां प्रोसेस हाउस संचालकों द्वारा दूषित पानी डाला जा रहा है वहां अगर कोई जानवर चला जाये तो वह भी जिंदा नहीं रह सकता। उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में करीब दो दर्जन गांवों के लोगों के खेतों को सिंचाई के लिए पानी सप्लाई होता है लेकिन यह अब प्रदूषित हो रहा है। पूर्व में इस बांध से भीलवाड़ा को भी पीने का पानी उपलब्ध हुआ था और भविष्य में भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां मछली पालन भी होता है। उन्होंने कहा कि इसी तरह पानी दूषित होता रहा तो करोड़ों मछलियां जिन्दा नहीं रहेगी। 
गुर्जर ने प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और जिला प्रशासनिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे एक बार मौका मुआयना कर दूषित हो रहे गुवारड़ी बांध के पानी को बचायें ताकि कोठारी और बनास नदी की तरह यह बांध भी प्रदूषित न हो जाये। अगर ऐसा हुआ तो कई गांवों के लोगों की रोजी रोटी छिन जाएगी। 
एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि क्षेत्र में चर्म रोग और गंभीर बीमारियों की मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। प्रदूषित जल के चलते जमीन भी बंजर होने लगी है। ऐसे में प्रशासन को सख्ती बरतते हुए गुवारड़ी बांध में स्लज और दूषित पानी डालने पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के आस पास के प्रोसेस हाउसों के अलावा रिको क्षेत्र की औद्योगिक इकाईयों का दूषित पानी भी बाहले और नाले से होता हुआ गुवारड़ी बांध तक पहुंच रहा है। अगर रोकथाम नहीं हुई तो क्षेत्र के लोग जल्द ही गुवारड़ी बांध बचाओ संषर्घ समिति का गठन कर आन्दोलन करने को मजबूर होंगे। 

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