Monday, March 1, 2021

बजट में कृषि को लेकर उठाए बड़े कदम, कर्ज के लक्ष्य को बढ़ाकर 16.50 लाख करोड़ किया: पीएम नरेंद्र मोदी

 


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इस वर्ष के बजट में कृषि के लिए उठाए गए कदमों पर सरकारी का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने बताया कि सरकार की ओर बजट में कृषि को लेकर कई जरूरी और बड़े कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे सरकार ने कृषि कर्ज के लक्ष्य को बढ़ाकर 16.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों के लिए कई योजनाओं के आवंटन को लेकर भी बात की। पीएम मोदी ने बजट 2021-22 में कृषि के लिए उठाए गए कदमों पर बोलते हुए कहा कि सरकार ने कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाकर 16.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया है - पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण अवसंरचना निधि 40,000 करोड़ रु. माइक्रो इरीगेशन फंड दोगुना किया गया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के भारत को कृषि उत्पादन बढ़ाने के बीच फसल के बाद या खाद्य प्रसंस्करण क्रांति और मूल्य संवर्धन की आवश्यकता है। पीएम ने कहा कि यह देश के लिए अच्छा होता कि यह 2-3 दशक पहले किया गया होता।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज ये समय की मांग है कि देश के किसान की उपज को बाज़ार में ज़्यादा से ज़्यादा विकल्प मिलें। सिर्फ उपज तक किसानों को सीमित रखने का नुकसान देश देख रहा है। हमें देश के कृषि क्षेत्र का प्रोसेस्ड फूड के वैश्विक मार्केट में विस्तार करना ही होगा। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज हमें कृषि के हर सेक्टर में हर खाद्यान्न, फल, सब्जी, मत्स्य सभी में प्रोसेसिंग पर विशेष ध्यान देना है। इसके लिए जरूरी है कि किसानों को अपने गांवों के पास ही स्टोरेज की आधुनिक सुविधा मिले। खेत से प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचने की व्यवस्था सुधारनी ही होगी। पीएम मोदी ने कहा कि हमें देश के एग्रीकल्चर सेक्टर का, Processed Food के वैश्विक मार्केट में विस्तार करना ही होगा।हमें गांव के पास ही Agro-Industries Clusters की संख्या बढ़ानी ही होगी ताकि गांव के लोगों को गांव में ही खेती से जुड़े रोजगार मिल सकें। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत किसान रेल के लिए सभी फलों और सब्जियों के परिवहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। किसान रेल भी आज देश के कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क का सशक्त माध्यम बनी है। पीएम मोदी ने कहा कि खेती से जुड़ा एक और अहम पहलू Soil टेस्टिंग का है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं। अब हमें देश में सॉइल हेल्थ कार्ड की टेस्टिंग की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचानी है। पीएम मोदी ने कहा कि आज एग्रीकल्चर सेक्टर में R&D को लेकर ज्यादातर योगदान पब्लिक सेक्टर का ही है। अब समय आ गया है कि इसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़े।हमें अब किसानों को ऐसे विकल्प देने हैं जिसमें वो गेहूं-चावल उगाने तक ही सीमित न रहे। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मोटे अनाज के लिए भारत की एक बड़ी जमीन बहुत उपयोगी है। मोटे अनाज की डिमांड पहले ही दुनिया में बहुत अधिक थी, अब कोरोना के बाद ये इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में बहुत प्रसिद्ध हो चुका है। इस तरफ किसानों को प्रोत्साहित कराना भी फूड इंडस्ट्री के साथियों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग लंबे समय से किसी न किसी रूप में की जा रही है। हमारी कोशिश होनी चाहिए की कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग सिर्फ व्यापार बनकर न रहे। बल्कि उस जमीन के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी हम निभाएं। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसानों को ऋण, बीज और बाजार, खाद ये किसान की प्राथमिक जरूरत है, जो उसे समय पर चाहिए। बीते वर्षों में किसान क्रेडिट कार्ड छोटे से छोटे किसानों तक, पशुपालकों से लेकर मछुआरों तक इसका दायरा बढ़ाया है।

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