होमगार्ड और आशा सहयोगी क्या स्थायी होंगे? सरकार ने विधानसभा में दिया ये जवाब

 

जयपुर. होमगार्ड्स और आशा सहयोगियों के स्थायीकरण के मामले आज विधानसभा में गूंजे. प्रश्नकाल के दौरान सवालों का जवाब देते हुए संबंधित विभागों के मंत्रियों ने कहा कि इन्हें स्थायी करने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. होमगार्ड कर्मचारियों को स्थायी करने के जुड़े सवाल का जवाब देते हुए मंत्री भजनलाल जाटव ने कहा कि होमगार्ड्स का गठन स्वयंसेवी संस्था के रूप में किया गया था. होमगार्ड का 5 वर्ष के लिए नामांकन होने पर सदस्यता प्रदान की जाती है और नियमों में होमगार्ड स्वयं सेवको को स्थायी नियुक्ति दिए जाने का प्रावधान नही है. हालांकि उन्होंने कहा कि होमगार्ड्स को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिले, इसके लिए हमने सभी विभागों को पत्र लिखे हैं.

सदन में जानकारी देते हुए मंत्री भजनलाल जाटव ने कहा कि अभी हमारे पास 48 हजार से ज्यादा होमगार्ड्स हैं और करीब 4800 पद रिक्त हैं. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में होमगार्ड्स का नियोजन 35 फीसदी ही था जिसे अब हम बढ़ाकर 58 प्रतिशत तक लेकर आए हैं.

आशा सहयोगनी स्वैच्छिक सेवा का पद
उधर आशा सहयोगनियों के मसले पर मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि यह स्वैच्छिक सेवा आधारित पद है और इन पर सेवा नियम लागू नहीं होते हैं. अभी आशा सहयोगनियों को 2700 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है. साथ ही चिकित्सा विभाग से कार्य आधारित भुगतान भी किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार अपने हिस्से का 60 प्रतिशत की बजाय वर्तमान में केवल 38 प्रतिशत अंशदान दे रही है और यदि पूरा अंशदान दे तो मानदेय में 4050 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री द्वारा भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया है. मंत्री ने कहा कि बजट उपलब्धता के आधार पर आशा सहयोगियों की मानदेय वृद्धि होगी वहीं इन्हें एक ही विभाग के अधीन रखे जाने के लिए भी पत्रावली प्रक्रियाधीन है.

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