दुष्कर्म मामले में आरोपी की डीएनए से हुई पुष्टि, बीस साल की मिली सजा

 


बांसवाड़ा /जिले की विशेष अदालत ने (लैंगिग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012) नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को बीस साल की कठोर कारावास की सजा के साथ 27 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आरोपी की सजा में अहम भूमिका किशोरी के गर्भ में पल रहे बच्चे की रिपोर्ट रही थी। जबकि किशोरी के गर्भ में बच्चा महज पांच महीने ही जीवित रहा।

मिली जानकारी के अनुसार विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेशंचंद्र बंसल ने तेरह वर्षीया किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में लीलवानी गांव के शिलास (20) पुत्र वागजी कटारा को आईपीसी की धारा 376(3), 363, 366 एवं 344 में दोषी मानते हुए 20 साल कठोर कारावास और 27 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

बताया गया कि था आरोपी के खिलाफ डेढ़ साल पहले 4 नवंबर 2019 को पीड़िता के पिता ने कलिंजरा थाने में नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उसने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गुजरात में मजदूरी के लिया था। वहां उनकी नाबालिग बेटी परिवार के लिए खाना पकाती थी। उसी दौरान आरोपी शिलास ने उनकी बेटी का अपहरण किया और उसे भीलान ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म करता रहा।

मामला दर्ज कराए जाने के दस महीने बाद पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया, तब वह गर्भवती थी। दुष्कर्म का मामला दर्ज किए जाने के बाद पुलिस ने गर्भ में पल रहे बच्चे तथा आरोपी का डीएनए लिया और जांच के लिए भेजा था। बांसवाड़ा जिले की विशेष अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को बीस साल की कठोर कारावास की सजा के साथ 27 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। 

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