उजाड़ पार्कों के रख रखाव के नाम पर लाखों खर्च, सभापति ने भुगतान पर लगाई रोक

 

भीलवाड़ा (विजय गढ़वाल)। शहर के पार्कों की देखरेख पर नगर परिषद लाखों रूपए खर्च कर रही है लेकिन पार्कों की हालत देखने लायक है। वह पार्क नहीं बल्कि कचराघर बने हुए है। न तो बच्चों के मनोरंजन के उपकरण काम करते है और न ही घास जैसी कोई चीज है। कागजों में मेंटीनेंस हो रहा है और चहेते लोगों के साथ मिलकर बंदरबांट की जा रही है। 
सूत्रों के अनुसार नगर परिषद के सौ से अधिक पार्क है लेकिन इनमें से कुछ पार्कों को ही विकसित कहा जा सकता है बाकी छोटे पार्क तो सिर्फ कागजों में है। जबकि ऐसे पार्कों की देखरेख और विकसित करने के नाम पर नगर परिषद लम्बे समय से बड़ी राशि खर्च की जा रही है। 
शहर के बीच कई छोटे पार्क है लेकिन वे उजाड़ पड़े है या यूं कहें कि कचराघर बने हुए है। आर.क.कॉलोनी में सांई मंदिर के निकट भी ऐसा ही पार्क है जो पूरी तरह से उजाड़ है। इसी तरह नगर विकास न्यास के सामने भी पार्क के नाम पर चारदीवारी बनी हुई है। जबकि शहर के बीच सबसे महंगी नागौरी गार्डन व्यवसायिक क्षेत्र का पार्क भी कचराघर बन गया है। देखरेख के नाम पर वहां चौकीदार और बागवान भी रखे होने की बात सामने आई है। 
इस संबंध में जब सभापति राकेश पाठक से हलचल ने बातचीत की तो उनका कहना था कि उन्हें भी इस तरह की शिकायत मिली है। इस पर उन्होंने ऑफिस नोट जारी कर भुगतान पर रोक लगा दी है। भुगतान तब तक नहीं किया जाएगा तब तक क्षेत्र का पार्षद उस पार्क के ओके होने की रिपोर्ट नहीं देगा। पाठक के इस आदेश से नगर परिषद में खलबली मची है। पार्कों के नाम पर हो रही बंदरबांट में यह भी चर्चा आई कि पार्क परिषद के ही किसी कारिन्दे ने निकट लोगों को दिलाये हुए है लेकिन पाठक ने कहा कि इस मामले की कोई शिकायत नहीं आई है अगर कोई शिकायत आई तो उसकी जांच कराई जाएगी।

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