लाछूड़ा में अवैध खदान ढही, मलबे में दबे सभी 7 शव निकालेे, 9 घंटे चला रेस्क्यू, केमरी में मातम

 


 भीलवाड़ा/आसींद प्रेमकुमार गढ़वाल/ मंजूर।  आसींद थाने के लाछूड़ा इलाके में क्वाट्र्ज पत्थर की एक अवैध खदान बुधवार दोपहर ढह गई। खदान में घटना के वक्त मजदूरी कर रही तीन युवतियों सहित सात मजदूरों की मलबे में दबने से मौत हो गई। हृदयविदारक इस घटना से लाछूड़ा ही नही, बल्कि आस-पास के गांवों के बाशिंदों में भी हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में लोग खदान पर जमा हो गये। कलेक्टर-एसपी सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। करीब 9 घंटे रेस्क्यू अभियान चलाकर शवों को मलबे से निकाला गया। 5 शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिये गये, जबकि देर रात निकाले गये दो शवों को मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया है।  
आसींद पुलिस व ग्रामीणों के अनुसार, लाछूड़ा में एक खेत में अवैध रूप से क्वाट्र्ज पत्थरों की अवैध खदान पिछले चल रही थी। रोजमर्रा की तरह बुधवार सुबह भी मजदूरी के लिए मजदूर खदान पर पहुंचे। इनमें तीन युवतियां और चार युवक थे, जो खदान में कार्य कर रहे थे। दोपहर में अचानक यह खदान भरभराकर ढह गई। खदान ढहने की सूचना लाछूड़ा गांव पहुंची तो वहां से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गये और इसकी सूचना पुलिस, प्रशासन और चिकित्सा विभाग को दी। इसके बाद सबसे पहले आसींद पुलिस मौके पर पहुंची और आस-पास मौजूद लोगों को वहां से दूर किया। साथ ही मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू के लिए  जेसीबी ,  ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मौके पर बुलाई गई। 
जानकारों की माने तो खदान 50 फीट लंबी, 60 फीट चौड़ी और करीब 70 से 80 फीट गहरी है।  उधर, जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल के साथ ही बदनौर, शंभुगढ़ सहित आस-पास के थानों से जाब्ता बुलवा लिया गया। मांडल विधायक रामलाल जाट, जिला कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते, पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा, आसींद व बदनौर एसडीएम, माइनिंग टीम भी मौके पर पहुंची हैं और घटनास्थल का जायजा और घटना की जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी कलेक्टर-एसपी ने दिये हैं।  यह खदान अवैध बताई जा रही है। उधर, रेस्क्यू शुरू होने के करीब 5 से 6 घंटे बाद एक-एक कर 5 शवों को बाहर निकाल लिया गया। इन सभी शवों को करेड़ा ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिये गये। इसके बाद भी रेस्क्यू जारी रहा जो रात 11 बजे तक चला। अंत में दो शवों को बाहर निकाला गया, जिन्हें राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया है। इसके बाद ही पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।  

इन 7 लोगों को लील गई अवैध खदान
प्रहलाद पुत्र कैलाश भाट, धर्मा पुत्र तेजू भाट, काना पुत्र रामा भाट, गणू पुत्र नारू भील, हिंगलाज पुत्री कैलाश भाट, मीना पुत्री हजारी भील निवासी कैमरी व लापलियाखेड़ा निवासी मीना पुत्री भागू भील को यह अवैध खदान लील गई। 

केमरी पर बरपा कुदरत का कहर,एक ही गांव के 6 लोगों की गई जान, पसरा मातम
अवैध खदान में जान गंवाने वाले सात में से 6 लोग करेड़ा थाने के के मरी गांव के निवासी हैं। इनमें दो युवतियां भी शामिल हैं। इसके अलावा एक युवती लापलिया की रहने वाली है। केमरी गांव में एक साथ 6 मौतों को लेकर मातम पसरा हुआ है। भाट व भील जाति के इन मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों की चीत्कार से पूरा गांव शोक में डूब गया। यहां तक की अधिकांश घरों में चूल्हे तक नहीं जले।  

खदान पर थे दस मजदूर, तीन बाहर और सात थे अंदर, तीन बाहर से भागे
घटनास्थल पर मौजूद लोगों की माने तो इस अवैध खदान पर मजदूरी करने वाले मजदूरों की संख्या दस तीन युवतियों सहित सात मजदूर खदान में मजदूरी करने उतर चुके थे, जबकि तीन बाहर से अंदर जाने ही वाले थे कि तभी भरभराकर मलबा गिरने लगा । यह देखकर तीन बाहर जो मजदूर थे, वो चिल्लाने लगे। उन्होंने ही हादसे की जानकारी अन्य लोगों को दी। इसके बाद वे, वहां से डर के मारे चले गये। अभी ये पता नहीं चल पाया कि ये तीन लोग कौन थे। ये लोग घटना के बाद वहां नहीं मिले।

रेस्क्यू ऑपरेशन में इन्होंने किया शव तलाशने का काम
खदान के मलबे में दबे शवों को निकालने के लिए 4 जेसीबी, आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ ही एक फोकलेन मशीन, एसडीआरएफ की भीलवाड़ा और अजमेर की दो टीमें शामिल थी। इन दो टीमों में 35 कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा आसींद थाने का पुलिस स्टॉफ भी इनके साथ मशक्कत करता नजर आया।  

 

लॉकडाउन में सीज हो चुकी है खदान, फिर कैसे चली?
जानकारी के अनुसार, जिस खदान में आज सात मजदूर दबे यह खदान अवैध है। बीते माह लॉकडाउन के दौरान माइनिंग विभाग की टीम ने इस खदान पर कार्रवाई करते हुये एक फोकलेन मशीन जब्त करते हुये खदान को भी सीज कर दिया था। ऐसे में सवार यह उठता है कि इस कार्रवाई के बाद अवैध खदान किसके आदेश से दुबारा चली। एक बार कार्रवाई के बाद माइनिंग विभाग ने इस खदान पर नजर क्यूं नहीं रखी। मौके पर मौजूद लोग मिलीभगती से खदान चलने के आरोप लगाते नजर आये।

अवैध खनन प्रशासन के लिए चुनौती- एसडीएम शर्मा
आसींद उपखंड अधिकारी छोटूलाल शर्मा ने कहा कि यह बहुत ही दुखद घटना है। अभी खदान में कुछ मजदूरों के दबे होने की सूचना मिल रही है। उन्होंने कहा कि पहली प्राथमिकता हमारी, मजदूरों को बचाना है और इसके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन एक गंभीर मामला है। प्रशासन के लिए भी चुनौती है। इस खदान पर पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अब सख्त कार्रवाई की जायेगी। संचालक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया जा रहा है। उन्होंने आमजन से अपील करते हुये कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनर्रावृति न हो, इसके लिए सभी को सावधानी बरतनी चाहिये। 

खेत को ठेके पर लेकर चलाई जा रही थी खदान
पुलिस की माने तो जहां खदान संचालित हो रही थी, वह खेत मुस्लिम समाज के एक व्यक्ति का है, जिसे  सूरजपुरा के व्यक्ति ने खनन कार्य के लिए लीज पर ले रखी है। पुलिस सूरजपुरा गई, लेकिन वह घर पर नहीं मिला।   ऐसी प्रारंभिक तौर पर जानकारी सामने आई है।  सच्चाई का पता पुलिस जांच से ही चल पायेगा। 

 ये भाई-बहन साथ निकले मजदूरी पर
हिंगलाज और उसका भाई प्रहलाद दोनों सुबह खदान पर मजदूरी के लिए साथ निकले थे। तब इन दोनों को यह आभास जरा भी नहीं था कि वे, जिंदा घर लौटकर नहीं आयेंगे। इन दोनों सहित 6 भाई बहन है।  
इकलौती थी मीना- लापलिया खेड़ा निवासी बाबूलाल भील की इकलौती बेटी मीना भी खदान हादसे में जान गंवा बेटी। वह अपने पिता की इकलौती बेटी थी।  मीना के अलावा पिता के एक बेटा है।  
 आठ-भाई-बहनों में  एक था काना-काना उर्फ कन्हैयालाल आठ भाई-बहनों में एक था। उसकी मौत से भाई-बहनों के आंसू थम नहीं रहे थे। उनका रो-रो कर बुरा हाल था। 
मां-बाप पहले गुजर गये, बच्चे कर रहे थे मजदूरी- धर्मा भाट की खदान में दबकर मौत हो गई। बताया गया है कि इसके माता पिता की पहले मौत हो चुकी है। धर्मा सहित पांच-भाई बहन थे। ये सभी माता-पिता की मौत के बाद मजदूरी कर अपना गुजर-बसर कर रहे थे।  
 चार भाई-बहनों में एक थी मीना- हजारी भील के चार-बेटे-बेटी हैं। इनमें से एक मीना सबसे छोटी बेटी थी। उसकी आज खदान हादसे में जान चली गई। मीना की मौत से भाई-बहनों  पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों का भी रो-रोकर हाल-बेहाल था।  

 

  

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