भीलवाड़ा का चातुर्मास विरल चातुर्मास - आचार्य महाश्रमण

 


भीलवाड़ा (प्रकाश चपलोत) महातपस्वी परमपूज्य आचार्य महाश्रमण द्वारा प्रतिपादित जिनवाणी का श्रवण व्यक्ति की ज्ञान चेतना को आत्म दर्शन की ओर अग्रसर करने वाली है। पूज्य आचार्यश्री के पावन सान्निध्य में आज चतुर्दशी के अवसर पर "हाजरी" मर्यादा पत्र का वाचन हुआ। इस अवसर पर समस्त साधु-साध्वियों ने गुरूदेव के समक्ष मर्यादा सूत्रों का उच्चारण किया। आचार्यप्रवर के इंगित से नवदीक्षित साध्वीवृन्द ने लेखपत्र का वाचन किया। गुरूदेव ने कृपा करते हुवे साध्वीवृन्द को इक्कीस-इक्कीस कल्याणक (आध्यात्मिक निधि) की बख्शीश दी।  मंगल प्रवचन में पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा- यह भीलवाड़ा का चातुर्मास एक प्रकार से विरल चातुर्मास है। इतने साधु-साध्वियों का बहुत वर्षों बाद गुरुकुवास में चातुर्मास हो रहा है। इस समय को सभी सार्थक बनाने का प्रयास करे। जीवन दो चीजों से जुड़ा हुआ है- शरीर और आत्मा। आत्मा अदृश्य होती है पर अतीन्द्रिय ज्ञान द्वारा इसे जाना जा सकता है। जितनी सीमा तक हो सके व्यक्ति को अपनी प्रतिभा, ज्ञान का विकास करना चाहिए। इस समय का हम अच्छा उपयोग कर सके इस ओर ध्यान देना चाहिए। कितने ही विद्वान चारित्रआत्माएं इस बार साथ है। सबमें आपस में ज्ञान का आदान-प्रदान होता रहे। यह चातुर्मासकाल ज्ञान की प्राप्ति का सुंदर अवसर है। ज्ञान ग्रहण कर उस पर फिर मनन चिंतन भी हो तो ज्ञान और पुष्ट हो जाता है। ज्ञानर्जन से व्यक्ति के चिंतन, वक्तृत्व और बौद्धिक क्षमता का विकास होता है।  गुरूदेव ने आगे कहा कि साधु का आचार उसकी संपत्ति होती है। पांच महाव्रत, पांच समितियां एवं तीन गुप्तियां का जो व्रत है उसके सामने विश्व के सब धनवानों की संपति का भी कोई मूल्य नहीं है। आचार, चारित्र की संपत्ति अमूल्य है जो आगे तक साथ जाती है। जीवन में मर्यादा एवं आचार निष्ठा के प्रति जागरूकता रखनी चाहिए। प्रमाद वश कोई दोष लग जाए तो प्रायश्चित द्वारा इस संयम की चद्दर को निर्मल कर लेना चाहिए। कार्यक्रम में 'शासन श्री' साध्वी श्री गुणश्री जी की स्मृतिसभा का आयोजन हुआ। साध्वीजी का गत 05 अगस्त 2021 को बीदासर में देवलोकगमन हो गया था। आचार्यश्री ने साध्वीजी की आत्मा के प्रति मंगलकामना करते हुए उद्गार व्यक्त किये। मुख्यमुनि महावीर कुमार जी, साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभा जी ने भी वक्तव्य प्रदान किया।
कार्यक्रम में शासन गौरव साध्वी श्री कल्पलता, साध्वी श्री शुभप्रभा, साध्वी श्री संवरप्रभा, साध्वी श्री सुषमा कुमारी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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