ब्रेस्ट फीडिंग को लेकर कहीं आप भी तो नहीं हैं इन गलत धारणाओं की शिकार !

 


हर साल 1 अगस्त से लेकर 7 अगस्त तक वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक (World Breastfeeding Week) मनाया जाता है. इसका उद्देश्य फीडिंग के फायदों को लेकर लोगों को सजग करना है. यहां जानिए कुछ ऐसी शंकाओं के समाधान जिनकी वजह से अक्सर फीड कराने वाली महिला परेशान हो जाती हैं.

 ब्रेस्ट फीडिंग

ब्रेस्ट फीडिंग को लेकर तमाम महिलाओं में धारणा है कि फीड कराने से ब्रेस्ट का आकार बढ़ जाता है और फिगर खराब हो जाता है. इस कारण से तमाम महिलाएं बच्चे को फीड कराने से कतराती हैं. जब बच्चे को सबसे ज्यादा मां के दूध की जरूरत होती है, तब भी वे उसे अक्सर बॉटल से दूध पिलाती हैं. इससे बच्चे को मां के दूध से मिलने वाले पोषक तत्व पूरी तरह नहीं मिल पाते और बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ता है.

साथ ही फीड न कराने वाली महिलाओं की सेहत पर भी इसका प्रभाव होता है क्योंकि फीडिंग से सिर्फ बच्चे को ही लाभ नहीं मिलता, बल्कि फीड कराने वाली महिला का भी कई बीमारियों से बचाव होता है. 1 अगस्त से 7 अगस्त के बीच चल रहे वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक (World Breastfeeding Week) के मौके पर जानिए उन तमाम बातों का सच, जो आपके मन में व्यर्थ की चिंता पैदा करती हैं.

 

 

ब्रेस्ट का आकार बढ़ना प्राकृतिक प्रक्रिया

विशेषज्ञों की मानें तो प्रेग्नेंसी के समय से ही महिलाओं के ब्रेस्ट के आकार में फर्क आ जाता है, ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है. आप अगर फीड नहीं भी कराएंगी तो भी इसके प्राकृतिक रूप से बढ़ रहे आकार को नहीं रोक सकतीं. इसलिए फीडिंग से फिगर खराब होने वाली धारणा को पूरी तरह से दिमाग से निकाल दें.

 

सिर्फ बच्चे नहीं महिला के लिए भी फायदेमंद है फीडिंग

मां के दूध को बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार माना जाता है क्योंकि बच्चे की ग्रोथ के लिए जरूरी सारे पोषक तत्व उसे मां के दूध से मिल जाते हैं. इसलिए कम से कम छह माह से एक साल तक तो हर बच्चे को फीड कराना ही चाहिए. लेकिन अगर आप ये सोचती हैं कि फीड कराने से सिर्फ बच्चे को ही लाभ होता है, तो आप गलत सोच रही हैं. मां बनने के बाद फीड कराना हर महिला के लिए जरूरी है, क्योंकि अगर महिला बच्चे को फीड नहीं कराएगी तो उसका दूध पस में बदल सकता है जो उनके लिए काफी कष्टकारी हो सकता है. इसके अलावा फीड कराने से महिला का ब्रेस्ट व ओवेरियन कैंसर से भी बचाव होता है.

 

लेटकर दूध पिलाना सही नहीं

तमाम महिलाएं बच्चे को लेटकर दूध पिलाती हैं, लेकिन एक्पर्टस इसे गलत मानते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार लेटकर दूध पिलाने से कई बार दूध बच्चे की सांस नली में जाने का खतरा होता है. ऐसे में उसे निमोनिया, साइनोसिस जैसी परेशानी हो सकती है. बच्चे की जान भी खतरे में पड़ सकती है. इसलिए लेटकर दूध पिलाने से परहेज करें.

बुखार में ब्रेस्टफीडिंग कराना सही या गलत

कई बार महिला को बुखार आ जाता है तो वो बच्चे को फीड नहीं कराती, क्योंकि उसके मन में संदेह होता है कि कहीं बच्चे को भी बुखार न आ जाए. लेकिन ये धारणा भी गलत है. बुखार की सटीक वजह जानें और उसका इलाज कराएं. इसके साथ बच्चे को फीड भी कराएं.

 

मिक्स फीडिंग कराना कितना सही

मिक्स फीडिंग का मतलब है कि मां का दूध देने के अलावा बॉटल से भी फीड कराना. इसको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि छह माह तक तो बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए. इसके बाद अगर मां के दूध से बच्चे का पेट नहीं भर पाता है तो मिक्स फीडिंग करा सकते हैं.

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