गांव का ये मोक्ष धाम दुख की घड़ी में देता है सुकून


 भीलवाड़ा.। पंचमुखी मोक्ष धाम की तर्ज पर   जावल पंचायत का अखेपुर ग्राम में सेवानिवृत्त शिक्षक के प्रयास से तैयार किए गए  हराभरा मोक्षधाम में अंतिम संस्कार में शामिल होने  वाले लोगों को  सकून देता है। इसके विकास में भामाशाहों का पैसा व पंचायत की अहम भूमिका रही है।

अखेपुर में मोक्षधाम की जमीन पहले चरागाह में थी। इसे श्मशान में बदलने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई। जिला कलक्टर की मदद से जमीन को श्मशान घाट में दर्ज कराया। सरपंच अंबेश चौधरी ने बताया कि मोक्षधाम की स्थिति ठीक नहीं थी। दो-तीन वर्ष पहले तत्कालीन सरपंच धापू देवी की निगरानी में श्मशान घाट में कार्य ने चार चांद लगा दिए। वर्तमान मोक्षधाम में मनरेगा व अन्य सरकारी योजना एवं दानदाताओं के सहयोग से लाखों रुपए का निर्माण कराया। छायादार, फलदार व औषधीय पौधे लहरा रहे हैं। आधुनिक स्टाइल में लकड़ीनुमा आरसीसी के छायागृह बनाए गए हैं। दाह संस्कार के लिए चबूतरे पर 25 फीट ऊंचा शैड बनाया।
मोक्षधाम में बैठने के लिए चौक में आरसीसी, रंगीन ब्लॉक व एक दर्जन ब्रांच आरसीसी के बनाए। दस हजार लीटर की टंकी बनवाई। इससेकरीब एक दर्जन नल के साथ स्नानघर बनवाया। लोगों ने 2 वर्ष में पौधों को पेड़ बनाया।
ग्रामीणों के अनुसार, मोक्षधाम में रात दिन एक कर खुद के खर्चे से पौधे लगाए। पानी पिलाया। इसे संवारने का जिम्मा सेवानिवृत्त अध्यापक भवानी शंकर चौधरी कर रहे हैं। उन्होंने मोक्षधाम के विकास में दो लाख रुपए का सहयोग किया।

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