दुसरो की निंदा का समय आये तब हो जाओ मौन: त्रयम्बकेश्वर

 


 

भीलवाड़ा हलचल। बाल ब्रह्मचारी अनन्त विभूषित त्रयम्बकेश्वर चैतन्य महाराज ने कहा की कभी भी किसी भी जीव का तिरस्कार नहीं करना चाहिए। संत श्री मंगलवार को हरी सेवा धाम उदासीन सनातन मंदिर में चातुर्मास प्रवचन के तहत श्रद्धालु समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा की दुनिया में कमजोर आदमी को कोई सम्बल नहीं देता है। ताकत के साथ सब खड़े मिलते हैं। पवित्रता का पालन नहीं करेंगे तो मंत्र साथ नहीं देंगे। नोका में अगर छिद्र हो तो वह व्यक्ति को पार नहीं लगा सकती। व्यक्ति का अंतिम संस्कार पूर्ण विधि-विधान से होना चाहिए। जब दूसरे की निन्दा का समय आये और अपनी प्रशंसा का अवसर आए तो हमें गूंगा हो जाना चाहिए। जब आप की प्रशंसा दूसरे कर रहे हो एवं दूसरों की निंदा करने का अवसर आए तो मौन हो जाना चाहिए।  प्रवक्ता रजनीकांत आचार्य ने बताया की कथा के प्रारम्भ में 49 दीपक जलाकर त्रयम्बकेश्वर महाराज का 49 वां जन्मोत्सव मनाया गया। हरीसेवा धाम के मयाराम महाराज ने महाराज श्री का शॉल एवं मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर स्वागत अभिनंदन किया। समस्त संतो ने उन्हें पुष्प  देकर जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर डीएल काष्ठ ने कहा की संतों के सानिध्य में ही जीवन सफल होता है। मंदिर में भगवान के दर्शन होते हैं जबकि संत जीवन दर्शन कराते हैं। आयोजक परिवार के राधेश्याम अग्रवाल ने बताया की हरिशेवा धाम उदासीन आश्रम सनातन मन्दिर में महामंडलेश्वर हंसराम उदासीन महाराज के सानिध्य में प्रवचन प्रतिदिन अपराह्न 3 से शाम 5 बजे तक चल रहे है। प्रवचन का फेसबुक पर सीधा व यूट्यूब पर शाम को प्रसारण किया जा रहा है। संयोजक परिवार के छीतरमल, कृष्ण गोपाल व प्रह्लाद अग्रवाल ने बताया की संत श्री के साथ  दंडी स्वामी प्रबोधाश्रम महाराज, नृसिंह भारती महाराज, आचार्य हरि ओम महाराज, स्वामी नारायण महाराज, ब्रह्मचारी देवेश महाराज भी ज्ञान गंगा बहा रहे हैं। मंगलवार को कथा में महाराज श्री का स्वागत चित्र मल अग्रवाल, डॉक्टर डीएल काष्ठ, वरिष्ठ संघ प्रचारक एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री आरोग्य भारती लक्ष्मण भाई ने किया

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