परंपरागत एवं देशी बीज हमारी धरोहर है, किसान इसे संजोकर रखे

 


 

 

भीलवाड़ा हलचल किसानों को यदि अपनी आमदनी बढ़ानी है तो कंपनियों के मकड़जाल से निकल कर खुद का बीज बचाकर रखना होगा। उक्त विचार रिटायर  कृषि अधिकारी बी एल सैन ने कट्स द्वारा संचालित प्रो ऑर्गेनिक परियोजना के अन्तर्गत आयोजित बीज बैंक कार्यशाला में व्यक्त किए। उन्होंने किसानों को बताया कि यदि किसान जैविक खेती को अपना कर खाद, बीज और दवाई अपने खेत पर बनाकर बाजार की अपनी निर्भरता को कम कर सकता है जिससे उनकी आमदनी दोगुनी हो सकती है। कार्यशाला में कट्स जयपुर से पधारे राजदीप पारीक ने किसानों को अपने खेत पर उन्नत बीज बनाने की विधियों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को बताया कि कुछ परपरागित फसलों को छोड़कर बाकी सारी फसलों का बीज किसान अपने खेत पर तेयार कर सकता है। उन्होंने बताया कि जबसे हाइब्रिड बीज आये है हमारे परंपरागत बीज जिसमे साठी मक्का, मसूर, उड़द, आदि के बीज धीरे धीरे लुप्त होते जा रहे हैं, जिनमें कीट एवम् रोगों से लडने की क्षमता अच्छी थी। कार्यक्रम में कट्स भीलवाड़ा के गौरव चतुर्वेदी ने बताया कि कट्स द्वारा संचालित परियोजना में अकोला के रामेश्वार लाल के यहां बीज बैंक की स्थापना की गई है जहां उन्नत एवम् नए बीजों का संकलन किया जाता है, तथा जो किसान यहां से बीज ले जाता है,उससे दोगुनी मात्रा बीज की वापस ली जाती है जिससे बीज बैंक में भी बीज की मात्रा बढ़ती रहती है और किसान को बीज के लिए पैसा नहीं देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बीज बैंक में लगभग बीस तरह कि फसलों के बीज संकलन किए गए है जो भीलवाड़ा में उत्पादित होती है। इसके अलावा यहां काला गेहूं, सोना मोती गेहूं, सफेद मक्का, मेथी, चना आदि के बीज संकलित किए गए है। कार्यशाला में जैविक किसान जमुना लाल धाकड़,गोपाल शर्मा, हरी शंकर समेत तीस किसानों ने भाग लिया तथा अपना उन्नत बीज बनाने का संकल्प लिया। कट्स के हेमंत एवम् राजेश ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

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