यहां के पेठे में मिलता है समोसा, रसभरी, आरेंज, अमरूद और लीची का स्वाद

 

नई दिल्ली | आगरा के पेठे तो खूब जाए होंगे, लेकिन दिल्ली में समोसा, रसभरी, आरेंज, अमरूद और लीची वाले पेठे का स्वाद मिल जाए तो..जी हां, पूठकलां कंझावला रोड पर आगरा के पागलखाने वालों की मशहूर दुकान है। भले ही यह नाम सुनकर आपको हंसी आ रही हो लेकिन यहां पेठे और घेवर का स्वाद लेने हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी लोग पहुंचते हैं।

मिल जाए दो पल की हंसी

दुकान संचालक विजय गुप्ता 20 साल से इस दुकान को चला रहे हैं। कहते हैं वर्ष 1933 से उनके पूर्वज आगरा में पेठे की दुकान चला रहे थे, लेकिन 1958 में वे आगरा से दिल्ली आ गए। विजय कहते हैं भागदौड़ भरी जिंदगी में दो पल की हंसी बहुत जरूरी है। इसलिए उन्होंने दुकान का नाम ऐसा चुना जिसे पढ़ते ही लोगों के चेहरे पर हंसी तैर जाए। यह नाम लोगों को आकर्षित भी करता है।

एक दो नहीं, 50 तरह के पेठे

पेठे में आपने दो-चार तरह के फ्लेवर का स्वाद लिया होगा, लेकिन यहां तो गिनती करते थक जाएंगे इतने फ्लेवर हैं। पान पेठा, समोसा पेठा, रसभरी, आरेंज, अंगूरी, अमरूद, लीची सहित पचास तरह के पेठे का स्वाद ले सकेंगे। सूखे मेवे और रबड़ी पेठा तो इतना लाजवाब है कि एक दो खाने से जी नहीं भरेगा।

फलों के एसेंस और खोया से करते हैं तैयार

पेठा बनाने के लिए पेठे के फल का छिलका हटाकर उसे चूने के पानी से साफ किया जाता है। फिर इसे अलग अलग आकार में काटते हैं। कटे हुए टुकड़ों को छह से सात घंटे भिगोकर रखा जाता है। फिर चाशनी में फलों के अर्क में पकाया जाता है। इसमें संतरा, अंगूर, अमरूद, लीची इत्यादि फलों के अर्क का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि फलों के अर्क में चीनी की मात्र अधिक न हो, क्योंकि अधिक चीनी से फल का असली स्वाद प्रभावित होता है। पेठे का सारा सामान फलों का अर्क खारी बावली से खरीदते हैं। पान पेठे में विशेष रूप से गुलकंद का प्रयोग किया जाता है। वहीं मावा पेठा में खोया भरा जाता है और फिर उसे गाढ़े चाशनी में डुबोकर तैयार किया जाता है।

घेवर भी है लाजवाब

सावन में यहां विशेष घेवर बनाए जाते हैं, जिसकी बिक्री जन्माष्टमी के 15 दिनों बाद तक होती है। यहां आप केसर, मलाई और दूध घेवर का स्वाद ले सकते हैं। इसकी खूब मांग भी रहती है। हरियाली तीज और रक्षाबंधन पर तो लोग विशेष कर यहां से घेवर लेकर जाते हैं। यहां के घेवर की खासियत यह है कि ये दूध, घी से लेकर मलाई तक सब कुछ घर का ही इस्तेमाल करते हैं।

नाम ही है लैंडमार्क: 174 और 114 नंबर की डीटीसी बस से यहां आ सकते हैं। दुकान मुख्य मार्ग पर ही है। बस स्टैंड भी दुकान के नजदीक ही है।

खुलने का समय:

सुबह आठ बजे से रात दस बजे तक, कभी भी यहां आ सकते हैं।

 

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