अभी से ही घर में खरीदकर रख लें लालटेन और मिट्टी का तेल, अगले 6 महीने तक नहीं मिलेगी बिजली, जानें क्यों?

 


नई दिल्ली : अगर आप लालटेन की रोशनी या कैंडल लाइट में डिनर करने के शौकीन हैं, तो अब आप इसे अपनी आदत में शुमार कर लें और घर में अभी से ही दो-चार लालटेन और 10-20 लीटर किरासन तेल खरीदकर रख लें. क्योंकि, भारत में अगले छह महीने तक बिजली की किल्लत रहने की आशंका जाहिर की जा रही है. इसका कारण यह है कि कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली बनाने वाले कई थर्मल पावर प्लांट से उत्पादन ठप हो जाएगा, जिसका असर आम जनजीवन पर पड़ना लाजिमी है.

 

त्योहारी सीजन से पहले देश में कोयला संकट बढ़ता जा रहा है। अगर कोयले का संकट देश में और गहराया तो फिर आपके घरों की बिजली भी गूल हो सकती है। दरअसल, देश में खानों से दूर स्थित (नॉन-पिटहेड) 64 बिजली संयंत्रों के पास चार दिन से भी कम का कोयला भंडार बचा है। कोयला खानों से दूर स्थित बिजली संयंत्रों को नॉन-पिटहेड कहते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन बिजली उत्पादन केंद्र में कोयले का स्टॉक खत्म हो रहा है और आने वाले तीन-चार दिनों में पूरा स्टॉक ही खत्म हो जाएगा।

केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए) की बिजली संयंत्रों के लिए कोयला भंडार पर ताजा रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि 25 ऐसे बिजली संयंत्रों में तीन अक्टूबर को सात दिन से भी कम समय का कोयला भंडार था। कम से कम 64 ताप बिजली संयंत्रों के पास चार दिनों से भी कम समय का ईंधन बचा है। सीईए 135 बिजली संयंत्रों में कोयले के भंडार की निगरानी करता है, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता दैनिक आधार पर 165 गीगावॉट है।

कुल मिलाकर तीन अक्टूबर को 135 संयंत्रों में कुल 78,09,200 टन कोयले का भंडार था, और यह चार दिन के लिए पर्याप्त है। रिपोर्ट में बताया गया कि 135 संयंत्रों में से किसी के भी पास आठ या अधिक दिनों का कोयले का भंडार नहीं था। हालांकि, सरकार का कहना है कि दो-तीन दिनों में कोयले की आपूर्ति कर दी जाएगी। बता दें कि भारत में बिजली उत्पादन के लिए सबसे अधिक कोयले का ही इस्तेमाल होता है।

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