बोरड़ा बावरियन में अणुव्रत महोत्सव का आयोजन

 

शाहपुरा  (मूलचन्द पेसवानी)। शाहपुरा तहसील के बोरड़ा बावरियान पंचायत मुख्यालय पर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में अणुव्रत समिति के तत्वावधान में अणुव्रत महोत्सव का आयोजन किया गया। इसी मौके पर पिछले सप्ताह भर स ेचल रहे अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का समापन अहिंसा दिवस के साथ किया गया।

संस्था प्रधानाचार्य सत्यनारायण कुमावत, जैन श्रावक संघ के संरक्षक देवेंद्र सिंह बूलियां की मौजूदगी में आयोजित समारोह में विद्यार्थियों को अणुव्रत आंदोलन के सिद्वांतों को आत्मसात करने का आव्हान किया गया। कार्यक्रम में अणुव्रत समिति के अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय, सचिव गोपाल पंचोली, अणुव्रत समिति के पूर्व अध्यक्ष रामस्वरूप काबरा, संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कृष्णकुमार कटारिया ने किया। विद्यालय में नवाचार के तहत स्थापित गांधी वाटिका में दीप प्रज्जवलन करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

प्रधानाचार्य सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि महात्मा गांधी का पूरा जीवन छोटे छोटे संकल्पों से अपने जीवन में बदलाव का एक ज्वलंत उदाहरण है। इन्ही संकल्पों के कारण वो हमारे महानायक बन सके। उन्होंने कहाकि अणुव्रत भले ही छोटे छोटे है पर सिद्व होने पर ये बड़े कारगर साबित होते है।

समिति सचिव गोपाल पंचोली ने सभी का स्वागत करते हुए अणुव्रत आंदोलन की उपादेयता, इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि मानस परिवर्तन का एक प्रबल प्रयोग है अणुव्रत। जिससे व्यक्ति नैतिक एवं चारित्रिक समन्वय बनाकर स्वयं के जीवन के साथ साथ परिवार, समाज, राष्ट्र की उन्नति का संवाहक बन सकता है।

संचिना अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक ने गांधी तेरे देश में लघु नाटिका प्रस्तुत कर वर्तमान समय की अवैधानिक गतिविधियों का चित्रण किया। उन्होंने समाज को जागरूक होकर इनसे लड़ने का आव्हान किया। समिति के पूर्व अध्यक्ष रामस्वरूप काबरा ने संयम व अनुशासन को साधकर मनसा वाचा कर्मणा के पथ पर अग्रसर होने की बात कही।

जैन श्रावक संघ के संरक्षक देवेंद्र सिंह बूलियां ने कहा कि अहिंसा का पालन करने पर यह भव तो सुधरता है भावी जीवन भी सुधर जाता है। सभी को जागरूक होकर ऐसा जीवन जीना चाहिए जिससे जगत के किसी प्राणी पर हमारे कारण संकट न आए।

शाहपुरा समिति के अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय ने कहा महापुरूषों जयंती उत्सव के आयोजन से आज की पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके अच्छे विचार ग्रहण शीलता बढ़ारते है। इसी के माध्यम से कर्मठ, चरित्रवान बना जा सकता है। तभी हम समय के साथ समाज को दिशा दे सकेगें।

प्राध्यापक अनूप मीणा ने अंत में सभी का आभार ज्ञापित किया। विद्यालय की छात्रा खुशी, कोमल, राधा, सपना, शिवानी, सुमन, सरिता ने गीत गायन की प्रस्तुति दी।

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