जलकर मरे दो बच्चों के मामले में तीन अस्पताल कर्मियों को थमाया नोटिस,ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो करायेंगे मुकदमा दर्ज

 


भीलवाड़ा (हलचल)। महात्मा गांधी अस्पताल में दो बच्चों की जलकर हुई मौत के मामले में जांच कमेटी ने अस्पताल के तीन कर्मचारियों को दोषी माना है। जबकि दो संविदाकर्मियों को इस मामले में पहले ही हटाया जा चुका है। 
जिला कलक्टर आशीष मोदी ने हलचल को बताया कि महात्मा गांधी अस्पताल के एनआईसीयू में दो मासूम बालकों की मौत को लेकर चार सदस्यीय चिकित्सा कर्मियों की जांच कमेटी बनाई गई जिसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इस रिपोर्ट में प्रारंभिक रूप से तीन कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। इन तीनों कर्मचारियों को चिकित्सा महकमा चार्जशीट देगा और उनसे नोटिस देकर जवाब मांगेगा। 
मोदी ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और अस्पताल के अधीक्षक डॉ.अरूण गौड़ ने लोगों के विरोध के पहले ही संविदा पर लगे दो कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिये जबकि प्लेसमेंट एजेंसी को नोटिस थमाया गया है। दो मासूमों की मौत के मामले में एक परिवार की ओर से परिवाद भी दिया गया है जिस पर पुलिस जांच भी की जा रही है। अगर दूसरा परिवार भी कार्रवाई चाहेगा तो उस पर भी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि दुबारा इस तरह की लापरवाही न हो। अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए गए है कि इस तरह की लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए भी कहा गया है। 
दूसरी ओर जांच कमेटी ने बीती रात अपनी रिपोर्ट अस्पताल अधीक्षक को दे दी थी । इस पर आज मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पवन कुमार और अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरूण गौड़ के बीच लम्बी मंत्रणा हुई। जांच रिपोर्ट के बाद सीसीटीवी और कम्प्यूटर दस्तावेज भी खंगाले गए है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जिला कलक्टर को इस संबंध में जानकारी दी। अस्पताल प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट शनिवार को जिला कलक्टर को सौंपी जाएगी। 
अस्पताल में हड़कम्प, किस पर गिरेगी गाज :
प्रारंभिक जांच पड़ताल में तो महात्मा गांधी अस्पताल में दो बच्चों की मौत के लिए ठेका नर्सेज कर्मियों को ही दोषी माना गया था लेकिन विरोध होने पर नर्सेज कर्मियों को भी नोटिस थमाए जा रहे है लेकिन गाज किस पर गिरेगी अभी इसका खुलासा नहीं हो पाया है जबकि एमसीएच प्रभारी के खिलाफ प्रदर्शनकारियों में खासा रोष है और वे उसे हटाने पर अड़े हुए है। इसके पीछे कई तर्क और चर्चाएं भी है। अस्पताल स्टाफ में भी इस बात की खुसर फुसर है कि लेबर रूम और बच्चों के वार्ड में शिकायत होने पर हटाए जाने वाले कर्मचारियों को कुछ समय के लिए हटाने के बाद फिर से लगा दिये जाते है और कुछ कर्मचारी तो वर्षों से वहीं जमे हुए है। 
ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो करायेंगे मुकदमा दर्ज :
दो बच्चों की मौत के बाद प्रदर्शन करने वाले नेता मोतीलाल सिंघानिया और पंकज डीडवानिया ने शुक्रवार को बीएचएन से बातचीत करते हुए बताया कि उपखंड अधिकारी ने दोनों बच्चों के लिए मुआवजे का प्रपोजल बनाकर जिला कलक्टर को भेजा है। साथ ही उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन उन्हें गुमराह कर रहा है। रिपोर्ट को लेकर अभी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो दोषी कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवायेंगे और 31 अक्टूबर को मांगे नहीं माने जाने पर भीलवाड़ा बन्द करायेंगे।

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