कभी पुलिस, राजनेता तो कभी संतों से तनातनी, इन 10 विवादों से घिरे रहे महंत नरेंद्र गिरि

 


देशभर के लाखों संतों की शीर्ष संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि डेढ़ दशक से अधिक समय से लगातार विवादों से घिरे रहे। बाघंबरी गद्दी संभालने के बाद उनका 2004 से विवादों का सिलसिला शुरू हुआ तो अंतिम सांस तक बना रहा। कभी पुलिस, कभी राजनेता, कभी संतों के साथ तनातनी हुई। हाल ही में उनका सबसे खास शिष्य आनंद गिरि से विवाद मीडिया की सुर्खियों में रहा। प्रस्तुत है महंत नरेंद्र गिरि से जुड़े विवाद:

विवाद-1
शिष्य आनंद गिरि को अखाड़े से निकाला

महंत नरेंद्र गिरि और उनके सबसे खास शिष्य आनंद गिरि के बीच हरिद्वार कुंभ से दूरियां बढ़ गईं। स्वामी आनंद गिरि पर परिवार से संबंध रखने और मठ-मंदिर के धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नरेंद्र गिरि ने उनके बाघम्बरी गद्दी मठ और बड़े हनुमान मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद कई दिनों तक दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे। आखिरकार 26 मई को लखनऊ में आनंद गिरि ने गुरु का पैर पकड़कर माफी मांग ली थी।

विवाद-2
आशीष गिरि की आत्महत्या पर उठे थे सवाल

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव महंत आशीष गिरि की 17 नवंबर 2019 को संदिग्ध स्थिति में मौत पर भी सवाल उठे थे। मूल रूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले आशीष गिरि दारागंज स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आश्रम में रहते थे। मौत के बाद कुछ लोगों ने महंत नरेंद्र गिरि पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि बाद में पुलिस जांच में कुछ नहीं निकला।

विवाद-3
सपा विधायक से जमीन को लेकर हुआ था विवाद

नरेंद्र गिरि का विवाद 2012 में सपा नेता और हंडिया से विधायक रहे महेश नारायण सिंह से जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर भी हुआ था। फरवरी 2012 में महंत ने सपा नेता महेश नारायण सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरिनारायण सिंह व 50 अज्ञात के खिलाफ जार्ज टाउन में मुकदमा दर्ज कराया था। दूसरे पक्ष ने भी नरेंद्र गिरि, आनंद गिरि व दो अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

विवाद-4
बार बालाओं पर मंदिर के रुपये उड़ाने के आरोप

अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि से विवाद के बाद योग गुरु स्वामी आनंद गिरि ने मई में दो वीडियो जारी कर मंदिर के रुपयों के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे। एक वीडियो में बार-बालाएं थिरक रही थीं और उनके साथ बड़े हनुमान मंदिर व मठ से जुड़े लोग डांस कर रहे थे। बार-बालाओं पर नोटों की बारिश भी की जा रही थी। दूसरे वीडियो में मंत्रोच्चार के बीच नोटों की बारिश हो रही थी। इसमें महंत नरेंद्र गिरि दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दे रहे थे।

विवाद-5
बीयर बार-डिस्को संचालक को बनाया महामंडलेश्वर

नोएडा में दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े डिस्को के साथ ही साथ बीयर बार के संचालक सचिन दत्ता उर्फ सच्चिदानंद गिरि को 31 जुलाई 2015 को महामंडलेश्वर बनाने के विवाद में भी नरेंद्र गिरि का नाम आया था। बाघंबरी गद्दी में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव और पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह की मौजूदगी में नरेंद्र गिरि ने सचिन का पट्टाभिषेक कर निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया था।

विवाद-6
गनर के ऊपर आय से अधिक संपत्ति के आरोप

महंत स्वामी नरेंद्र गिरि के गनर रह चुके सिपाही अजय सिंह के ऊपर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे। इस सिपाही के रहन-सहन और ठाठ-बाट पर सवाल खड़ा करते हुए लखनऊ की आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. नूतन ठाकुर ने डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर जांच कराने की मांग की थी। 61 लाख के फ्लैट पत्नी के नाम खरीदने का दावा किया था।

विवाद-7
किन्नर अखाड़ा को नहीं देते थे मान्यता

नरेंद्र गिरि किन्नर अखाड़े को मान्यता नहीं देते थे। उनका कहना था कि जगतगुरु शंकराचार्य ने 13 अखाड़ों की स्थापना की थी। किसी को भी 14वें अखाड़े के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। हालांकि 2019 के कुंभ में मेला प्रशासन ने किन्नर अखाड़े को जमीन और सुविधाएं दी थीं। उज्जैन में 13 अक्तूबर 2015 को किन्नर अखाड़े की स्थापना हुई थी। बाद में 2016 के उज्जैन कुंभ में अखाड़े ने स्वतंत्र रूप से पेशवाई की जगह देवत्व यात्रा निकाली थी।

विवाद-8
परी अखाड़ा के अस्तित्व पर उठाए सवाल

महंत नरेंद्र गिरि परी अखाड़े के अस्तित्व को नहीं मानते थे। उनका कहना था कि जिस त्रिकाल भवन्ता ने कहीं से दीक्षा नहीं ली, जो संन्यासिनी नहीं हैं, वे परी अखाड़ा बना रही हैं। त्रिकाल भवन्ता लगातार महिला संन्यासियों के लिए परी अखाड़ा की पैरवी करती रहीं।

विवाद-9
योगी सत्यम के खिलाफ कराई थी एफआईआर

नरेंद्र गिरि ने 8 अगस्त 2018 को क्रियायोग आश्रम के योगी सत्यम के खिलाफ धमकी देने के मामले में दारागंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अखाड़ा परिषद ने योगी सत्यम को फर्जी संतों की सूची में डाल दिया था। जिस वजह से विवाद बढ़ता चला गया।

विवाद-10
2004 में मठ बाघंबरी गद्दी के महंत बनने के बाद नरेंद्र गिरि का सबसे पहला विवाद तत्कालीन डीआईजी आरएन सिंह से हुआ था। आरएन सिंह से जमीन बेचने को लेकर कुछ विवाद हुआ, जिसके बाद डीआईजी ने मंदिर के सामने कई दिनों तक धरना दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने आरएन सिंह को सस्पेंड कर दिया तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।

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