7 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, मूर्तिकार माता की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे

 


 भीलवाड़ा हलचल।  7 अक्टूबर से नवरात्र की शुरुआत हो रही है। नवरात्रि के उत्साह और रंग अभी से बाजार में दिखाई देने लगे हैं। शहर के पंडालों में विराजमान होने वालीं मां दुर्गा की प्रतिमाओं को कलाकार अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मां की मूरत को सुंदर आकार और नौ रूपों में ढाला जा रहा है। शहर में स्थापित होने वालीं प्रतिमाओं को भी हर साल की तरह इस बार भी विशेष रूप दिया जा रहा है।  रेलवे स्टेशन मांडल के चार भाइयों के परिवार के करीब 20 सदस्यों द्वारा माता की मूर्ति को तैयार किया जा रहा है। यहां माता का विशेष शृंगार किया जाता है। मूर्तिकार पन्नालाल का कहना है कि इस साल मूर्तिकारों को  बहुत उम्मीद है। मूर्तिकार भी बड़ी उम्मीद से प्रतिमाएं बना रहे हैं।  

मां के बनाए जा रहे हैं सुंदर रूप
मूर्तिकार पन्नालाल ने बताया कि माता का विभिन्न रूपों में श्रंगार हो रहा है। मिट्टी के ही आभूषण पहनाएं गए हैं। जिनमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि यहां से प्रतिमाएं बाहर नहीं भेजी जाती है। वे, भीलवाड़ा के लिए ही मूर्तियां बनाते हैं।  प्रतिमा पर बारिकी से किए गए काम को लोग पसंद करते हैं। शहर के अलावा विभिन्न स्थानों पर जाने वाली प्रतिमाएं पहले से ही बुक करा ली जाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिमाओं पर कलर किया जा रहा है। कुछ दिन शेष रह गए हैं तो जल्द ही श्रंृगार करके माता की प्रतिमाएं तैयार हो जाएंगी। 

70-80 साल से कर रहे हैं मूर्तिकारी
पन्नालाल का कहना है कि उनके परिवार की दो पीढिय़ा पिछले 70-80 साल से मूर्तियां बनाने का काम कर रही है। पहले उनके दादा, फिर पिता और अब करीब 40 साल से उन्होंने यह काम अपने हाथ में लिया है। 

बाहरी दुकानों से पिट गया धंधा
मूर्तिकार पन्नालाल ने अपनी पीड़ा बयां करते हुये यह भी बताया कि अब बाहरी दुकानें भी भीलवाड़ा में सजने लगी है। ऐसे में उनका यह धंधा पिट गया है। अब फायदा कुछ नहीं मिलता है। गणेश चतुर्थीे पर उन्होंने 100 से 150 मूर्तियां गणेश जी की बनाई थी, लेकिन बिक्री मात्र 70 मूर्तियों की हुई। ऐसे में खर्चा निकलना भी मुश्किल हो गया। उनका कहना है कि सीजन के बाद वे मजदूरी कर अपना व परिवार का गुजर बसर करते हैं। 

बचपन में लगे इंजेक्शन से दिव्यांग हो गये थे पन्नालाल
आठवीं तक पढ़े मूर्तिकार पन्नालाल ने हलचल को बताया कि करीब 40 साल पहले उन्हें डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया था। इसके बाद उनका एक पैर खराब हो गया। दिव्यांग पन्नालाल ने कहा कि पैर का इलाज कराने का प्रयास भी किया, लेकिन डॉक्टरों ने यह कह दिया कि अब कुछ नहीं हो सकता है। यह पैर बेकार हो चुका है। 

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