84 वर्षीया रिटायर्ड जोइंट डायरेक्टर को भांजे ने कैदियों की तरह घर में किया नजर बंद, छोड़े तीन कुत्ते, वसीयत भी करवा ली नाम, पीडि़ता ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

 

 भीलवाड़ा विजय गढ़वाल। शिक्षा विभाग से रिटायर्ड जोइंट डायरेक्टर मोहनी राव को कैदियों की भांति न केवल घर में न केवल नजर बंद कर दिया गया, बल्कि वे, घर से बाहर नहीं जा सके, इसके लिए तीन कुत्ते भी घर में पाल रखे हैं।   84 वर्षीया राव की दर्द की यह दास्तां यहीं खत्म नहीं हो जाती है। उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है साथ ही खाने-पीने तक को कुछ नहीं दिया जाता। उनकी संपत्ति की वसीयत तक अपने नाम करवा ली गई। यह कृत्य किसी और न नहीं, बल्कि खुद उनके ही भांजे ने किया है। राव ने यह पीड़ा सोमवार को जिला पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा के समक्ष लिखित में बयां करते हुये अपने भांजे को पाबंद कराने की गुहार लगाई है। 
अजमेर जिले के केकड़ी कस्बे के कृष्णानगर की निवासी मोहनी राव पुत्री मोतीलाल राव का कहना है कि वे, शिक्षा विभाग से ज्वाइंट डायरेक्टर के पद से रिटायर्ड है। उनका कहना है कि वे 84 वर्षीय है और वर्षों से अपने भाई जगदीश प्रसाद राव के पास केकड़ी में रह रही है। मोहनी का कहना है कि उनके भांजे राहुल पुत्र भैंरूलाल राव ने उसकी माता अंजना राव की जनवरी 2020 में मृत्यु के बाद कोरोना काम में उन्हें (मोहनी) भ्रमित कर मेरी संपत्ति की वसीयत अपने नाम करवा ली। राहुल ने उनके साथ धोखाधड़ी कर चल-अचल संपत्ति हड़पने की गरज से उन्हें बताया कि आपके परिवार के सभी लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इसलिए आपको संभालने वाला कोई नहीं आ रहा है। उसने झूंठे मुकदमे भी लगवा रखे हैं। 
मोहनी का आरोप है कि डेढ़ साल से राहुल लगाकार धोखाधड़ी व झूंठ बोलकर उन्हें भ्रमित कर रखा था। मोहनी बताती है कि उन्हें राहुल ने कैदियों की तरह नजर बंद कर रखा था। अमानवीय व्यवहार करता। खाने-पीने और पहनने को नहीं देता। शराब पीकर आये दिन गाली-गलौच करता। मारने पर उतारु होता। मोहनी द्वारा जब परिवार के बारे में पूछती तो वह डराता-धमकाता और मारपीट पर आमादा हो जाता। ताकि मैं, परिवार के किसी सदस्य से नहीं मिल सकूं। 3 अक्टूबर को मैं, अपने छोटे भाई जगदीश उर्फ जग्गू के से मिली तो पता चला कि मेरे परिवार के सभी सदस्य जीवित है। वे, स्वस्थ है। राहुल के डर से उनसे मिलने नहीं आते। राहुल ने तीन कुत्ते पाल कर घर में छोड़ रखे हैं ताकि मैं, घर छोड़कर कहीं भी जाने लगू तो कुत्ते मुझे नौंच कर खा जाये। 
मोहनी का कहना है कि कल वे स्वैच्छा से चलकर जगदीश के घर तिवाड़ी मोहल्ला केकड़ी गई, जहां पता चला कि छोटे भाई रतन लाल की तबीयत काफी समय से खराब है। उनका कहना है कि वे, स्वैच्छा से छोटे भाई रतन लाल के घर भीलवाड़ा आ गई। आज सुबह पता चला कि राहुल ने मेरे दोनों भाइयों व उनके परिवार के सदस्यों पर झूंठा अपहरण व अन्य धाराओं में झूठा मुकदमा केकड़ी थाने में दर्ज करवा दिया है। मोहनी ने पुलिस अधीक्षक को यह पीड़ा बयां करते हुये गुहार लगाई कि उनके दोनों भाइयों व परिवार के खिलाफ अपहरण व अन्य कार्रवाई को निरस्त करवाये और उन्हें सुरक्षा प्रदान कर राहुल को पाबंद करवाये। 

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