भूलने की बीमारी डिमेंशिया के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें भूलकर भी नहीं करें नज़रअंदाज

 


थोड़ी बहुत भूलने की आदत हर उम्र के लोगों में होना सामान्य बात है। ऐसा कई बार होता है जब हम अपना वॉलेट और कार की चाबी रखकर भूल जाते हैं। हम अपने पुराने सहकर्मी जिसके साथ लंबे समय तक काम कर चुके होते है उसका नाम भूल जाते है। यह कुछ ऐसी भूलने वाली बातें हैं जो अक्सर हमारे साथ होती है। हमारा दिमाग दिनभर के अलग-अलग कामों में लगा रहता है जिसकी वजह से हम कई बार कम जरूरी कामों को भूल जाते हैं। भूलने की यह आदत हमारी मसरूफियत की वजह से होती है, लेकिन जब यह आदत गंभीर हो जाए तो आपको परेशानी में डाल सकती है।

भूलने की आदत उम्र के हिसाब से बढ़ती रहती है जिसे डिमेंशिया कहते है। डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है जो दो मस्तिष्क कार्यों, जैसे स्मृति हानि और निर्णय की हानि की विशेषता वाली स्थितियों का एक समूह है। डिमेंशिया की बीमारी की शुरुआत से पहले बॉडी में कुछ ऐसे संकेत दिखते हैं जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो उसका इलाज करने में आसानी होती है। आइए जानते हैं डिमेंशियां के शुरुआती संकेत कौन कौन से है।

 ज्यादा लोगों के बीच में सुनने में अस्मर्थता:

डिमेंशिया के शुरूआती लक्षणों की बात करें तो जो लोग शोरगुल में भाषण सुनने के लिए संघर्ष करते हैं उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा अधिक रहता है।

याददाश्त कमज़ोर होना:

याददाश्त कमज़ोर होना डिमेंशिया का सबसे बड़ा संकेत है। इस परेशानी से पीड़ित इनसान को जानकारी को याद रखने में दिक्कत होती है। ऐसे लोग जानकारी हासिल करने के लिए परिवार और दोस्तों पर निर्भर रहते हैं।

दैनिक कामों को करने में कठिनाई होना:

अगर आपको अपने रोज़मर्रा के काम जिन्हें आप सालों से करते आ रहे हैं उन्हें करने में दिक्कत हो रही है तो यह आपके लिए परेशानी के संकेत हो सकते है।

बोलते समय शब्दों का सही प्रयोग करने में दिक्कत होना:

डिमेंशिया से पीड़ित लोगों को अपने विचार शब्दों में बयां करने में दिक्कत होती है। ऐसे लोग गलत वर्तनी या व्याकरण संबंधी गलतियां करते हैं। उनकी लिखावट को पढ़ना मुश्किल हो जाता है।

मूड में बदलाव आना:

बार-बार मूड बदलने से आप डिमेंशिया के लक्षणों को आसानी से पहचान सकते हैं। डिमेशिया से पीड़ित इनसान कभी-कभी हंसमुख और एनर्जी से भरपूर महसूस करता तो कभी गंभीर दिखता है। अवसाद से पीड़ित लोगों में भी इस स्थिति के विकसित होने का खतरा होता है।

Popular posts from this blog

भीलवाड़ा नगर परिषद चुनाव : भाजपा ने 31, कांग्रेस ने 22 और निर्दलीय ने जीती 17 सीटें, बोर्ड के लिए जोड़ तोड़

वीडियो कोच ने स्कूटर को लिया चपेट में, दो बहनों की मौत, भाई घायल, बागौर में शोक

सिपाहियों के कातिल जोधपुर और बाड़मेर के, एक फौजी भी शामिल !