भारतीय पंचांग में माह के नामो में भी वैज्ञानिकता है: त्रयम्बकेश्वर चैतन्य महाराज

 


  भीलवाड़ा हलचल। बाल ब्रह्मचारी अनन्त विभूषित त्रयम्बकेश्वर चैतन्य महाराज ने कहा की भारतीय पंचांग में माह के नामों में भी वैज्ञानिकता है। जिस माह का नाम है उस माह की पूर्णिमा को वही नक्षत्र होगा। सन्त श्री सोमवार को हरीसेवा उदासीन सनातन मंदिर में चातुर्मास प्रवचन के तहत श्रद्धालु समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि आपका सामर्थ्य हो तो जहाँ अनजाने लोग निकलते हो वहां प्याऊ अवश्य लगानी चाहिए। विशेष रूप से बैसाख व जेष्ठ में। यह मत सोचो की जो काम लोकहित में किया जा रहा है उसमें हमारा नाम हो। नाम किसी का हो इसमे फर्क नहीं पड़ता है बस काम होना चाहिए। प्रसिद्धि को पचाना आना चाहिए। जब से एसी व कूलर आये तब से वृक्षो का महत्व कम हो गया लेकिन कोरोना ने वृक्षो की महत्वत्ता हमे समझा दी।  प्रवक्ता रजनीकांत आचार्य ने बताया की कथा के प्रारंभ में नारायण स्वामी ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ है।  शिक्षक समाज के प्रणेता है। प्रवचन के दौरान ओम शर्मा ने भजन अचुट्यम केश्वम कृष्ण दामोदरम... पेश कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। आयोजक परिवार के राधेश्याम अग्रवाल ने बताया की हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मन्दिर में महामंडलेश्वर हंसराम उदासीन महाराज के सानिध्य में प्रवचन प्रतिदिन अपराह्न 3 से शाम 5 बजे तक चल रहे है। प्रवचन का फेसबुक पर सीधा व यूट्यूब पर शाम को प्रसारण किया जा रहा है। संयोजक परिवार के छीतरमल, कृष्ण गोपाल व प्रह्लाद अग्रवाल ने बताया की संत श्री के साथ  दंडी स्वामी प्रबोधाश्रम महाराज, नृसिंह भारती महाराज, आचार्य हरि ओम महाराज, स्वामी नारायण महाराज, ब्रह्मचारी देवेश महाराज भी ज्ञान गंगा बहा रहे हैं।

 

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