लोग कैसे हो जाते हैं डेंगू का शिकार, क्या संक्रामक होता है यह बुखार?

 


लाइफस्टाइल डेस्क। गर्मी और खासकर बारिश के मौसम में मच्छर से होने वाली बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। भारत के भी कई हिस्सों में डेंगू के मामले बढ़ते नज़र आ रहे हैं। डेंगू से संक्रमित होने पर प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है। इसलिए इस मौसम में अगर आपको बुख़ार आता है, तो डेंगू की जांच ज़रूर करा लें। डेंगू होने पर बुखार के अलावा सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द भी होता है। इसके अलावा आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, कमज़ोरी, भूख न लगना, गले में दर्द होना, मुंह का स्वाद खराब हो जाना और शरीर पर रैशेज़ जैसे लक्षण भी नज़र आ सकते हैं।

डेगू के ज़्यादातर लक्षण आम वायरल फीवर जैसे ही होते हैं, इसलिए कई बार बुख़ार आने पर भी लोग वायरल समझ कर नज़रअंदाज़ी करते हैं। ऐसे में डेंगू के बारे में जानकारी होना ज़रूरी है, यह पता होना चाहिए कि डेंगू आखि कैसे फैलता है।

कैसे होता है डेंगू

डेंगू आमतौर पर मादा एडीज़ इजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। ये खास तरह के मच्छर होते हैं, जिनके शरीर पर चीते जैसी धारियां पाई जाती हैं। ये मच्छर खासतौर पर सुबह के समय काटते हैं। डेंगू की तरह मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी मच्छर से होने वाली बीमारियां आमतौर पर बरसात के दिनों और उसके बाद के महीने यानी जुलाई से अक्टूबर के बीच में तेज़ी से फैलती हैं।

क्या फैल सकता है डेंगू

जो शख्स डेंगू से पीड़ित होता है, उसके शरीर में काफी मात्रा में डेंगू वायरस पाया जाता है। इसके अलावा जब कोई एडीज़ मच्छर किसी डेंगू के मरीज़ को काटता है तो उसका खून भी चूसता है। इसके बाद जब यह मच्छर किसी स्वस्थ शख्स को काटता है, तो उसे भी डेंगू हो जाता है। क्योंकि मच्छर के काटने से उसके शरीर में भी वायरस पहुंच जाता है। जिससे वह शख्स भी डेंगू से संक्रमित हो जाता है।

हालांकि, डेंगू के मरीज़ से हाथ मिलाने, उसके साथ बैठने या उसके मुंह या नाक से निकलने वाली बूंदों के ज़रिए डेंगू नहीं होता। लेकिन क्योंकि डेंगू दूसरे तरीके से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैलाता है, इसलिए इसे संक्रामक रोग ही माना जाता है।

मच्छर की दो प्रजातियां फैलाती हैं डेंगू

इसके अलावा डेंगू बुखार मच्छरों द्वारा फैलाए जाने वाले चार तरह के वायरस के कारण होता है। इनमें सभी वायरस एडीज़ एजिप्टी (Aedes aegypti) या फिर एडीज एल्बोपिक्टर (Aedes albopictus) मच्छर की प्रजातियों के जरिए फैलते हैं।

डेंगू वायरस में चार अलग-अलग सेरोटाइप (DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4) भी शामिल होते हैं। जो कि जीन्स फ्लेवीवायरस, फैमिली फ्लेविविरिडे (Flaviviridae) से संबंधित हैं। वैसे तो एडीज़ एजिप्टि मच्छर अफ्रीका में पैदा हुआ था लेकिन अब ये दुनियाभर के कई क्षेत्रों में पाया जाता है।

जागरुकता है ज़रूरी

एक ज़रूरी बात यह भी कि ये बीमारी उन इलाकों में ज्यादा तेज़ी से फैलती है, जहां अधिक मच्छर पाए जाते हैं। वहां बेशक डेंगू के कुछ कम ही मरीज़ क्यों न हों लेकिन वहां पनप रहे मच्छरों से मरीज़ों की संख्या भी बढ़ सकती है। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी इलाके में कोई डेंगू का मरीज़ पाया जाता है, तो वहां सरकार को जागरुकता अभियान चलाना चाहिए ताकि यह बीमारी वहां ना फैले और लोग मच्छरों से बचाव के लिए संभव उपाय कर सकें।

Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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