बजी स्कूल की घंटी तो हर चेहरे पर छाई मुस्कान

 


भीलवाड़ा हलचल प्रहलादतेली कोरोना के कारण बंद स्कूलों में सोमवार को घंटी बजी तो बच्चों, अभिभावकों व शिक्षकों के चेहरों पर मुस्कान आ गई। अब तक घरों में ऑनलाइन अध्ययन कर रहे कक्षा छह से आठ तक के बच्चे कक्षा नवमीं से बारहवीं तक स्कूल खुलने के बाद से ही विद्यालय जाने को आतुर हो रहे थे। इसी आतुरता के कारण कोरोना के बाद स्कूल जाने के लिए सुबह बच्चे अपने आप ही जल्दी उठे और स्कूल की यूनिफार्म पहनकर तैयार हो गए। अभिभावकों की दिनचर्या भी बच्चों के स्कूल खुलने से बदल गई। जो लोग अब तक सुबह सात बजे बिस्तर छोड़ रहे थे। उन्होंने सुबह पांच- छह बजे बिस्तर छोड़ा और बच्चों को तैयार करने के साथ उनके लिए लंच तैयार किया।

स्कूल प्रशासन ने सरकार की गाईड़ लाईन के अनुसार बच्चों को शोसल डिस्टेंस के साथ ही मास्क व स्नेटराईज के बाद ही स्कूल में प्रवेश दिया।
भीलवाड़ा शहर के समीप राजकीय उच्च प्राथमिक विधालय बड़ी हरणी के शारिरिक शिक्षक डा.जगदीश चंद्र खटीक ने बताया की अभिभावकों को विश्वास में लेकर सोमवार से ही सरकार की गाईड़ लाईन के अनुसार कक्षास 6से8 तक की कक्षाएं शुरु हो रही है ।जिसमें 50प्रतिशत बच्चों को ही स्कूल बुलाया गया है ।आधे बच्चे कल स्कूल आयेगें।ओर स्कूल में कोराना गाईड़ लाईन के अनुसार ही शिक्षण कार्य करवाया जाऐगा।

 बच्चों का स्वागत
उच्च प्राथमिक स्तर के निजी स्कूल खुलने से निजी शिक्षण संस्थाओं के संचालकों के चेहरों पर भी खुशी आ गई। उन्होंने बच्चों का स्वागत विशेष रूप से किया। किसी स्कूल में बच्चों की कतार बनाकर फूल बरसाए गए। वहीं कई स्कूलों में बच्चों के भाल पर तिलक लगाकर उनकी अगवानी की गई।

 मजा आ गया

कोरोना के बाद दोस्तों से बात करनी होती थी तो पापा का मोबाइल ही उपयोग कर रहा था। आज स्कूल खुलने पर दोस्तों से मिलकर मजा आ गया। ऑनलाइन पढऩे पर समझ में कम आता था। अब कक्षा में बेहतर पढ़ाई होगी। आकाश, छात्र, कक्षा आठ

बच्चों के टीका लगने से पहले बुलाया
स्कूल खुलना अच्छा है। वहां पर ऑनलाइन की तुलना में पढ़ाई अच्छी होगी, लेकिन बच्चों के टीका लगने के बाद ही उनको स्कूल बुलाना चाहिए था। इससे कोरोना का खतरा कम हो जाता। -आरती, छात्रा,

बच्चों का अध्ययन होगा बेहतर
स्कूल खुलने से बच्चों का अध्ययन बेहतर होगा। निजी स्कूलों की ओर से कोरोना गाइड लाइन के अनुसार पूरी तैयारी की गई थी। जिससे संक्रमण का खतरा नहीं रहे। बच्चों को भी क्षमता से आधे ही बुला रहे है। लक्ष्मी नारायण

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