डिप्टी को बचाने के प्रयास में दूसरे डिप्टी sp सहित 4 निलंबित

 

नागौर. नागौर जिले के कुचामन वृत्त के चितावा थानाधिकारी प्रकाश चंद मीणा को करीब सवा माह पूर्व लिखित में दी गई रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज नहीं करने के मामले में एसपी अभिजीतसिंह ने जहां गुरुवार को लाइन हाजिर किया, वहीं शुक्रवार को प्रदेश के डीजीपी एमएल लाठर ने सख्त रवैया अपनाते हुए न केवल एसआई मीणा को सस्पेंड किया है, बल्कि पुलिस अधिकारी सैनी व महिला कांस्टेबल के अश्लील वीडियो पर पर्दा डालने का प्रयास करने वाले कुचामन सीओ मोटाराम बेनीवाल सहित जयपुर के झोटवाड़ा एसीपी हरिशंकर शर्मा व कालवाड़ थानाधिकारी गुरुदत्त सैनी को भी निलम्बित कर दिया है। गौरतलब है कि मामले की जांच एसओजी को सौंपी गई है।

चितावा थानाधिकारी मीणा ने थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति द्वारा महिला कांस्टेबल व एक पुलिस अधिकारी द्वारा बच्चे का यौन शोषण करने को लेकर गत 2 अगस्त को थाने में दी गई रिपोर्ट पर मामला दर्ज नहीं किया था। ताज्जुब की बात यह है कि इस प्रकरण को लेकर एसपी अभिजीत सिंह ने भी 10 अगस्त को मीणा को मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मीणा ने एसपी के आदेश को भी अनसुना कर दिया। बुधवार को महिला पुलिसकर्मी व आरपीएस अधिकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद डीजीपी एमएल लाठर ने दोनों को निलम्बित कर दिया था। इसके बाद जिला पुलिस ने हरकत में आते हुए गुरुवार को थानाधिकारी मीणा को लाइन हाजिर किया था, लेकिन शुक्रवार को डीजीपी ने पहले एपीओ आदेश निकाले और फिर निलम्बित कर दिया।

मीणा के ऊंचे रसूखात : लाइन हाजिर होने के बाद उसी थाने में फिर लगे
गौरतलब है कि 13 महीने पहले 5 अगस्त 2020 को एसआई प्रकाश चंद मीणा को चितावा थानाधिकारी के पद से हटाते हुए अजमेर के तत्कालीन रेंज आईजी हवासिंह घुमरिया के निर्देश पर तत्कालीन एसपी श्वेता धनखड़ ने लाइन हाजिर किया था। उस समय एसआई मीणा विभिन्न मामलों को लेकर विवादों में चल रहे थे, लेकिन जिले के अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे थे। इसके बाद मीणा का एक ओडियो वायरल हुआ, जिसमें वह एक विवाहित महिला से फोन पर अनर्गल बात की। करीब साढ़े 13 मिनट की बातचीत में थानाधिकारी ने महिला को रिकॉर्डिंग से बचने के लिए वॉइस कॉल करने के साथ पति-पत्नी के सम्बन्धों को लेकर कई सवाल किए। मीणा का ओडियो आईजी घुमरिया के पास पहुंचा तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए लाइन हाजिर कर ओडियो की जांच कराने के निर्देश दिए थे। जांच में क्या नतीजा क्या निकला, यह भी जांच का विषय है, लेकिन एसआई मीणा राजनीतिक रसूखात के दम कुछ दिन बाद ही वापस चितावा थाने में थानेदार लग गए।

एसपी के साथ मुख्यमंत्री के आदेशों की भी खुली अवहेलना
चितावा थाने में सवा महीने पहले महिला पुलिसकर्मी व पुलिस अधिकारी के खिलाफ परिवादी द्वारा दी गई रिपोर्ट की कॉपी नागौर पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई थी। जिस पर एसपी अभिजीतसिंह ने 10 अगस्त को चितावा थानाधिकारी मीणा को निर्देश देकर मामला दर्ज करने के लिए कहा था, लेकिन मीणा ने एसपी के निर्देश को भी दरकिनार कर दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अगस्त, 2019 में आदेश जारी कर थाने के अंदर एफआईआर दर्ज करना कंपलसरी कर दिया था। साथ ही लोगों को राहत देने के लिए यह भी व्यवस्था की कि यदि थाने में एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं तो एसपी ऑफिस के अंदर जीरो एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए थे। मुख्यमंत्री के आदेश को भी एसआई मीणा ने गंभीरता से नहीं लिया।

नियम तो यह है, कार्रवाई करना अधिकारियों के हाथ
संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर किसी भी थानाधिकारी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154(1) के प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करनी अनिवार्य है। यदि थानाधिकारी द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है तो एसपी द्वारा धारा 154(3) में ऑर्डर देकर दर्ज करवाई जाती है। यदि एसपी द्वारा भी एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है तो 156(3) में न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए जाते हैं। यदि किसी भी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने के बावजूद थानाधिकारी एफआईआर दर्ज नहीं करता है तो उसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 166(ए) के तहत मुकदमा दर्ज करना पुलिस अधिकारी की कानूनी बाध्यता है।

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