तेरह किलोमीटर पैदल मार्च कर मांडल से जेल चौराहा पहुंचा हिंदू समाज, मंदिर खोलने की करेगा मांग

 


भीलवाड़ा हलचल।
मांडल के देवनारायण मंदिर को स्थायी रुप से दर्शनार्थियों  व सेवा पूजा अर्चना के लिए खोलने की मांग को लेकर हिंदू संगठनों व समाज के दो से ढाई हजार लोग मांडल से 13 किलोमीटर का पैदल मार्च निकालकर भीलवाड़ा जेल चौराहे  पहुंच गये। ये लोग अपनी तीन सूत्रीय मांगों के संदर्भ में  मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर आशीष मोदी को ज्ञापन देंगे।  
बताया गया है कि मांडल में एक विवादित स्थल जो की 45 साल से बंद है । उसका दरवाजा पिछले दिनों गोपाल सिंह गुर्जर नामक युवक ने खोल दिया था। इसे लेकर  समुदाय विशेष के लोगों ने  मांडल में जुलूस निकाला और आपत्तिजनक नारे लगाते हुये टिप्पणी की थी। इससे आक्रोशित हिंदू समाज ने रविवार को स्वैच्छिक मांडल बंद का आह्वान किया था।  उधर, हिंदू संगठनों के लोगों ने तहसील कार्यालय के बाहर मीटिंग आहूत की। मीटिंग में  सोमवार को मांडल  तेजाजी चौक से पैदल मार्च कर भीलवाड़ा  कलेक्ट्रेट पहुंचने और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देने का निर्णय लिया था। इसी के तहत आज सुबह से मांडल तेजाजी चौक में लोग जुटने शुरू हो गये। दोपहर करीब सवा बारह बजे 2 से ढाई हजार लोग जुट गये। इसके बाद ये लोग पैदल मार्च करते हुये कलेक्ट्रेट के लिए निकले। करीब 13 किलोमीटर का सफर तय कर ये लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां ये लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। ये अब मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देंगे। उधर, पैदल मार्च को लेकर पुलिस प्रशासन ने कलेक्ट्रेट पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किये हैं। कलेक्टर के दोनों और बेरिके टिंग की गई। साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

निर्धारित समय से दो घंटे देरी से शुरु हुआ मार्च
 निर्धारित समय से दो घंटे देरी से मांडल से पैदल मार्च शुरू हुआ। पैदल मार्च में जिले भर के हिन्दू समाज के युवकों ने हिस्सा लिया। पैदल मार्च के साथ चौपहिया, दोपहिया वाहन भी थे। मार्ग में कई जगह पुष्प वर्षा से युवाओं का स्वागत किया। पैदल मार्च में पूर्व मंत्री कालूलाल गुुुर्जर, उदयलाल भडाना, गोपाल सिंह गुुुर्जर बस्सी, नन्दलाल गुुुर्जर, सहित बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

मंदिर को स्थायी रूप से खोलने की करेंगे मांग
देवनारायण संघर्ष समिति की ओर से मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन दिया जायेगा। इसमें बताया गया है कि समस्त हिंदू समाज की अस्था के प्रतिक एवं जन-जन के अराध्य भगवान देव नारायण जी का ग्राम मांडल में प्राचीन मंदिर है, जहां पर वर्षों से गुर्जर समाज सहित हिंदू समाज के व्यक्ति भगवान के मंदिर पर पूजा अर्चना व दर्शन के लिए आते-जाते हैं। मंदिर को हमेशा के लिए खोला जाये।

1555  में  निर्माण चालू करवाया था मंदिर का
ज्ञापन में बताया कि देवनारायण मंदिर का निर्माण गुर्जर समाज के पंचों ने खेताजी-नेताजी ने सम्वत 1555 में निर्माण चाूल करवाया, जो सम्वत 1557 तक मिति माघ सुद सातम के दिन पूर्णावति हो गई। 1561 में बड़वा जी की पौथी के रिकार्ड में दर्ज है।

समुदाय विशेष का कोई लेना-देना नहीं
ज्ञापन में बताया गया है कि मांडल गांव का तालाब सम्वत 840 में देवनारायण जी के परदादा मांडूराव जी ने करवा कर मांडल गांव की नींव की स्थापना की। 1237 वर्ष पहले ही गांव को बसाया। देवनारायण भगवान का इतिहास तभी से है। समुदाय विशेष का इनसे कोई लेना-देना नहीं है। यह मंदिर हिंदु समाज की आस्था का केंद्र है। विगत वर्षो से मांडल के देवनारायण मंदिर पर समुदाय विशेष के असामाजिक तत्वों ने मंदिर पर झडाई झगड़ा कर 1977 से ही 145 कोर्ट रिसीवरी नियुक्त कर रही है।

स्वामित्व का दावा हो चुका खारिज
ज्ञापन के अनुसार, देवनारायण मंदिर के स्वामित्व के दावे को मुस्लिम समुदाय की ओर से तलिया मीठू शाह फकीर का होने का दावा किया, जिसे सिविल न्यायाधीश  (क.ख.) मांडल प्रकरण 113 /92 ईदी द्वारा अपने निर्णय 25 मार्च 10 सेअस्वीकार कर दिया गया है जिससे स्पष्ट है कि मौके पर देवनारायण का मंदिर है। इसके बावजूद पुलिस ने देवनारायण मंदिर को हिंदुओं को नहीं  सौंपा है। इस निर्णय के विरुद्ध की गई अपील भी 28 जनवरी 214 को खारिज हो चुकी है। ऐसे में रिसीवरी हटाई जानी चाहिये अन्यथा हिंदुओं में आक्रोश दिनब दिन बढता जा रहा है।

मंदिर नहीं खोला तो प्रदेश व देश में आंदोलन को होंगे मजबूर
समिति ने ज्ञापन में कहा कि रिसीवरी निरस्त कर मंदिर को पुन: दर्शनार्थियों के लिए खोला जाये। देवनारायण संघर्ष समिति ने यह अपील प्रशासन से करते हुसे कहाकि  समय रहते देवनारायण मंदिर को नहीं खोला गया तो समस्त हिंदू समाज पूरे प्रदेश और देश में आंदोलन करने को मजबूर होगा।

ये रखी मांगें
ज्ञापन में मांडल देवनारायण मंदिर स्थायी रूप से दर्शनार्थियों के लिए खोलने, इस प्रकरण से जुड़े युवाओं पर दर्ज मामले वापस लिये जायें।
-30 जुलाई 21 को इसी मंदिर प्रकरण को लेकर दर्ज मुकदमे वापस हो एवं जब्त वाहनों को रिलीज करवाने काआदेश जारी करावें।
- 11 मार्च 22को समाज विशेष के लोगों द्वारा सांप्रदायिक भावना भड़काने वाले व्यक्तियों की धरपकड़ अभी तक नहीं हुई, जिन्हें तुरंत प्रभाव से गिरफ्तार कर कस्बे सहित जिले में शांति कायम करवाई जाये।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि उक्तमांगों को तत्काल प्रभाव से मांनी जाये एवं हिंदु समाज में जो रोष हे, उसके लिए समाधान किया जाये। अन्यथा हिंदु समाज उग्र आंदोलन करेंगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। 

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