परंपरागत नाले और बाहले अतिक्रमण की गिरफ्त में, नहरें हुईं गुम

 



भीलवाड़ा राजकुमार माली
भीलवाड़ा में सोमवार रात हुई तेज बारिश ने शहर की सीवरेज व्यवस्था की ही पोल नहीं खोली बल्कि अवैध निर्माण और अतिक्रमणों के चलते आज सड़कें दरिया में तब्दील हो गई। इसके पीछे एक ही कारण नजर आया कि पारंपरिक नालों को संकीर्ण कर दिया गया है। अब इन नालों के अतिक्रमणों और अवैध निर्माणों को हटाने की जरूरत है नहीं तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
भीलवाड़ा में कुछ सालों पहले तक एक दर्जन से ज्यादा नाले और नहरें थीं लेकिन नगर परिषद और नगर विकास न्यास की अनदेखी और सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते नाले सिकुड़ते गए और नहरें गुम हो गईं। सिंचाई विभाग की आजाद नगर, जवाहर नगर और पुलिस लाइन इलाकेे में नहर हुआ करती थी लेकिन सिंचाई विभाग की जमीन और नहर कहां गई, कोई बताने को तैयार नहीं है।
गायत्री आश्रम का नाला काफी विस्तरित था लेकिन उसे नगर विकास न्यास ने संकीर्ण करते हुए जमीन को बेच डाली। कोठारी नदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। नदी में महंगे प्लॉट काट दिए गए और वहां बिल्डिंगें खड़ी हो गईं। आजाद नगर से रामधाम होते हुए शास्त्रीनगर में एक नाला था लेकिन वह अब काफी छोटा हो गया है जिससे पानी उसमें पूरी तरह नहीं समा पाता और अब सड़कों पर फैलकर घरों में घुसने लगा है। यही नाला शास्त्रीनगर से होकर गुजरता है। इस गंदे नाले का पानी गांधी सागर तालाब में न गिरे, इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च कर लाइन डाली गई लेकिन वह नकारा हो गई और अब भी पानी गांधी सागर में ही जाता है। दादाबाड़ी में भी काफी बड़ा नाला था लेकिन उस पर भी अवैध निर्माण हो गए। यह नाला आगे चलकर तो काफी संकरा हो गया है। मोती बावजी के निकट भी नाले पर अवैध निर्माण होने से आज इसके परिणाम सामने नजर आए। वहां सड़कों पर पानी भर गया। पांसल रोड पर बालाजी के मंदिर के निकट किसी समय बाहला हुआ करता था जो आज सिमटकर एक नाले में परिवर्तित हो गया है। इसके कारण आज दोपहर तक सड़क पर पानी भरा रहा और आसपास के क्षेत्र में फैल गया। कुछ भूमाफियाओं ने इस बाहले पर कब्जा कर लिया है जिसके चलते यह काफी संकीर्ण हो चला है। ऐसे ही कई परंपरागत नाले और बाहले बंद हो गए।
कभी धांधोलाई तालाब काफी फैला हुआ था लेकिन उसके पेटे को कम कर वहां भूखंड काट दिए गए जिससे परंपरागत जलस्त्रोत की आकृति भी नष्ट हो गई और हालात आज देखने को मिले जहां पानी की निकासी के प्रबंध नहीं होने के कारण सड़कों पर पानी ही पानी नजर आता है। धांधोलाई में जहां पानी पहले सीधा पहुंचता था, आज उसके लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा है।
दादाबाड़ी क्षेत्र में आज बारिश के चलते नाला उबकने से सड़क पर तिलक नगर मार्ग पर चार फीट तक पानी भर गया जिसमें एक रोडवेज बस फंस गई। गनीमत रही कि कोई हादसा नहीं हुआ। बस से यात्रियों को निकालने में शहर के प्रथम नागरिक राकेश पाठक ने अहम भूमिका निभाई और इस मौके पर उन्होंने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि शहर के परंपरागत नालों पर अतिक्रमण व अवैध निर्माण हो गए हैं जिन्हें हटाना जरूरी हो गया है लेकिन इन्हें हटाना नगर परिषद के अकेले के बूते की बात नहीं है। इसमें नगर विकास न्यास, जिला प्रशासन और पुलिस का सहयोग भी जरूरी है।     

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