पीपलूंद में मनाया गणपति जन्मोत्सव , घर-घर विराजेंगे नन्हे गणपति

 


पीपलूंद ( दुर्गेश रेगर ) जहाजपुर उपखंड क्षेत्र के पीपलूंद कस्बे में गणेश जी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम हर्षोल्लास से मनाया गया | गणेश जी के मंदिर पर सुबह ग्राम वासियों ने गणेश जी की प्रतिमा  को नया वाका चढ़ाकर श्रृंगार किया गया | इसके बाद दोपहर में महाआरती कर के लड्डू, और मोदक, का भोग लगाकर गणेश चतुर्थी के दिन को गणपति  के रूप में मनाया जाता है | मान्यता है, कि गणपति का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि बुधवार को दोपहर के समय हुआ था | दोपहर 12:00 बजे पूजा अर्चना कर महाआरती करके गणपति का जन्मोत्सव मनाया |
आज से 10 दिन तक गणपति उत्सव का शुभारंभ हो चुका है | श्रद्धालु अपने अपने घरों में संपूर्ण विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद प्रथम पूज्य गणपति को विराजमान कर रहे हैं | अगले 10 दिन तक आराधना के बाद अनंत चतुर्दशी को गणेश प्रतिमाओं का ढोल नगाड़ों और गणपति बप्पा मोरिया के जयकारों के  साथ विधिपूर्वक विसर्जन किया जाएगा | गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या से ही गणेश मंदिरों में भक्तों का आने-जाने का तांता लगा रहा |
पीपलूंद गणेश मंदिर के पुजारी राजेंद्र जोशी, ने बताया कि इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर एक ऐसा दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है जैसा भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के समय बना था साथ ही ऐसा संयोग 10 साल पहले बना था शास्त्र के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दिन के समय बुधवार को हुआ था | इस साल भी वह सारे योग संयोग बन रहे हैं जो गणेश जी के जन्म पर बने थे दिन बुधवार तिथि चतुर्थी नक्षत्र चित्रा और मध्याह्न काल यानी दोपहर का समय , ये ही  वो  संयोग था जब पार्वती जी ने मिट्टी का गणेश जी बनाया था | और शिव जी ने उसमें प्राण डाले थे | ओर आज भी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि बुधवार  का  दिन है | प्रतिवर्ष 7 दिनों तक अपने घर में मिट्टी से बनी हुई गणपति प्रतिमा की स्थापना करते हैं | इन दिनों में श्रद्धालु और परिवार के लोग नियमित रूप से गणेश जी की आराधना और आरती करते हैं | और बाद में मोतीचूर के लड्डू और मोदक, का भोग लगाते हैं गणेश जी को मोतीचूर से बने लड्डू अतिप्रिय थे | इस अवसर पर गणेश मूंदड़ा, देवेंद्र बसेर, सुवा जाट, बन्ना खारोल, गोपाल सेन, दिनेश डाड, गोविंद मूंदड़ा, कृष्ण गोपाल पारीक, प्रहलाद पारीक, इत्यादि ग्रामीण उपस्थित रहे |

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