Monday, May 31, 2021

कोरोना लील रहा लाखों जीवन बनके भूखा गिद्ध,

 


 

भीलवाड़ा,(हलचल)  साहित्यिक संस्था नवमानव सृजनशील चेतना समिति की ओर से  कोरोना काल मे रविवार को 20वीं व 2021 की पंचम ऑनलाइन काव्यसंध्या आयोजित की गई। इस ऑनलाइन काव्यसंध्या के अध्यक्ष व संचालक डॉ एसके लोहानी खालिस,प्रतीकात्मक मुख्य अतिथि शाहपुरा के कवि डॉ कैलाश मण्डेला एवं विशिष्ट अतिथि बीगोद के वरिष्ठ कवि महेंद्र बाबेल ललकार रहे। सरस्वती वंदना नवीन नव एवं लाजवंती शर्मा ने प्रस्तुत की।

 

संस्था महासचिव कविता लोहानी ने बताया कि काव्यसंध्या के शुभारंभ स्वरुप डॉ एसके लोहानी खालिस ने कोरोना संकट पर कविता "कोरोना लील रहा लाखों जीवन बनके भूखा गिद्ध, करुणा का बीज ना कोई हो गया यह सूखा सिद्ध," "जीवन का फ्यूज उड़ने से पहले यूज करलो,घृणा के बम फूटने से पहले डिफ्यूज करलो"  व गीत "जिंदगी जीलो सज्जन,प्यार का ड़ालो मक्खन,छा जाएगी मस्ती हर पल,वहम के खोलो ढक्कन" प्रस्तुत किये। बीगोद के नवीन नव ने कोरोना पर गीत "जीवन बचाने को वेक्सीन लगाना है,कोरोना को शक्तिहीन बनाना है", "कोरोना नहीं रहेगा कल खुशी का होगा हर पल,परीक्षा की घड़ी है ये मिलेगा कल इसका फल" व "तम्बाकू गुटखा खरीदते है,पाउच मजे से फाडते हैं,छपी चेतावनी है चेताती,हम नजरअंदाज करते हैं", लाजवंती शर्मा ने गीत "तेरे सीने में भी प्रीत की अगन जलाना चाहती हूँ,बुझी हुई-सी चिंगारी को हवा दिखाना चाहती हूँ", आरके जैन ने "माँ के हाथ की रोटी,पतली हो या मोटी,उसमें पेबस्त स्नेह और आशीर्वाद,आज तलक है मुझे याद", श्यामसुन्दर तिवाड़ी मधुप ने "बाल दिवस की गौरव गाथा आज सुनाने मैं आया,प्यारे चाचा के जीवन की मधुर-मधुर यादें लाया", बिजौलिया के नंदलाल धाकड़ अधिकारी ने विरह गीत "आँगणिये खड़ी मरवण थाकी बाट जोह,मुलक मुलक फेर मुलक आंख्याँ पथरागी जी", प्रह्लाद सोनी सागर ने गीत "देह दर्पण देखकर जब,कृष्ण-सां शृंगार करती,तब समझना अब रूहानी प्यार की शुरुआत होगी", रंजनासिंह चाहर ने "दिनकर की किरणों ने धरा पर जब अपनी गर्मी फैलाई,संध्या को शशि की किरणों ने शीतलता अपनी बरसाई", "तूं करले प्रभु की भक्ति तने अजब मिलसी शक्ति,तूं जपले नाम प्रभु का जिंदगी चार दिनां की है", नरेन्द्र वर्मा नरमन ने "चांद खिडकी पर आया मेरे साथ हो गया,कुछ गुफ्तगू की ख्यालों में खो गया", शाहपुरा के डॉ कैलाश मण्डेला ने "गर रहूँ चुप तो बहुत ही तड़पडाते हो,खोल दूं जो मुंह अगर तो बडबडाते हो", ओम अंकुर ने "हाथों को धोते रहें,रखें साफ हर कोना,धीरे-धीरे अलविदा होगा कोरोना", बीगोद के महेंद्र ललकार ने "छोरा-छोरी भागे कहीं भी आग लागे,एक्सीडेंट-नाता लोग-लुगाई में राड़ जागे" व "लतिका दुनिया को नाज है आपकी पैदाईश पर,रब आमीन कहे आपकी हर ख्वाहिश पर", महेंद्र शर्मा ने "जिंदादिल भी जंग हारे जा रहे हैं,मौत के साये यहाँ मंडरा रहे हैं" और काव्यसंध्या के समापन स्वरुप डॉ खालिस ने कविता "परिवार से बड़ी संस्था कोई और नहीं,बड़ों के आशीष से बड़ी भेंट कोई और नहीं,मिले-जुले प्रयासों से फले-फुले हर परिवार, परस्पर भावों से भरा संसार कोई और नहीं" व गज़ल "जब से आप मिले तब से दिल खिला है,बिन मांगे हमें क्या-क्या न मिला है" जैसी एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कर काव्यसंध्या को सार्थक बनाया।

 

सभी कवियोँ ने दिये गये विषयों, समसामयिक घटनाओं व मनपसंद विषयों पर रचनाएं Text/Audio/Video रुप में प्रस्तुत कीं। डॉ कैलाश पारीक,इंजी.एसएस गंभीर,निरंजन नीर, सतीश व्यास आस एवं दुष्यंत लोहानी ने भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। अंत में संयोजक डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया।

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